अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस
- जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में चल रहा बच्चों का इलाज, अब तक 510 और इस वर्ष अप्रैल से सितंबर सामने आए 139 केस
अनुज शर्मा
करनाल। अभिभावकों का अपने बच्चों से हकला कर और तुतला कर बोलना खतरनाक साबित होता जा रहा है। यह बात जिला नागरिक अस्पताल के ऑडियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के पास इलाज के लिए पहुंच बच्चों के अभिभावकों की काउंसलिंग में सामने आ रही है।
जिला नागरिक अस्पताल के जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) की प्रबंधक अर्चना ने बताया कि जिले में बोलने से संबंधित 510 केस हैं। इस वर्ष अप्रैल से सितंबर तक 139 केस सामने आए हैं। जो डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। वहीं सिर्फ हकलाने से संबंधित 22 केस नियमित रूप से अस्पताल के ऑडियोलॉजी विभाग में स्पीच थेरेपिस्ट के पास इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्णा शर्मा ने बताया कि आजकल अभिभावक अपने बच्चों से लाड-प्यार में सही तरीके से न बोलकर हकला व तुतला कर बोल रहे हैं। जिससे बच्चे अपने अभिभावकों से उसी भाषा को सीख रहे हैं। इसे देखते हुए वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस की थीम सुनने की शक्ति रखी गई है। यह थीम इसी पर प्रकाश डालती है कि हकलाने वाले लोगों को दूसरों को सुनना सिखाना चाहिए, जिससे विश्वास और समझ बनाने में मदद मिल सकती है। संवाद
हकलाना या तुतलाना जन्मजात नहीं
ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्णा शर्मा ने बताया कि हकलाना या तुतलाना जन्मजात नहीं है। ऐसा लोगों में भ्रम है कि यह हकलाना या तुतलाना जन्मजात होता है लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि वहीं आजकल अभिभावक अपने बच्चों से बात न करके मोबाइल थमा देते हैं। इससे भी वे सही तरीके से नहीं बोल पाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को समय देना चाहिए और उनसे सही तरीके से बातचीत करनी चाहिए।