- चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने एजेंसी के लिए लागत की निर्धारित
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रेलवे रोड पर प्रस्तावित टी-फ्लाईओवर परियोजना को नए साल में रफ्तार मिल सकती है, क्योंकि इसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में रेट तय कर स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसकी लागत करीब 127 करोड़ रुपये हैं, जिसमें सिविल वर्क का टेंडर 111.88 करोड़ रुपये का है। उम्मीद है कि इसी साल हरियाणा सरकार इसकी अगली कार्यवाही के लिए दिशा निर्देश जारी कर सकती है।
टी-फ्लाईओवर के निर्माण की योजना तो स्मार्ट सिटी ने बनाई थी, स्मार्ट सिटी का कार्यकाल पूरा हो गया, लेकिन टी-फ्लाईओवर का निर्माण शुरू नहीं हो सका। एजेंसियों का सर्वे तो एक साल पहले ही पूरा हो चुका था। एजेंसियों ने ये भी कहा था कि निर्माण में समय अधिक लगेगा, क्योंकि जिस मार्ग पर फ्लाईओवर का निर्माण होना है, वहां शहर का मुख्य बाजार है। यातायात का दबाव भी ज्यादा है। ऐसे में निर्माण कार्य की गति धीमी ही रहेगी। जिसे अलग-अलग फेज में पूरा करने के लिए तीन वर्ष की जरूरत होगी।
टी फ्लाईओवर का टेंडर 28 जून को सातवीं बार खुला था। टेंडर खुलने से पहले निर्माण कार्य को लेकर एचएसवीपी कार्यालय में एक्सईएन धर्मबीर मेहला की अध्यक्षता में एजेंसियों के साथ बैठक भी हुई थी। जिसमें चार एजेंसियों ने अपने-अपने सर्वे की रिपोर्ट पेश की। दो कंपनियों ने परियोजना को पूरा कराने का दावा किया था। इस पर दोनों कंपनियों ने लागत तय की थी, जिन्हें स्वीकृति के लिए हरियाणा सरकार को भेजा गया था। क्योंकि 10 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्यों को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की स्वीकृति प्रदान करती है। निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार चंडीगढ़ में बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने इस बहुप्रतीक्षित टी-फ्लाईओवर में लागत निर्धारित कर दी है। जिसकी कार्यवाही रिपोर्ट अगले 10 दिनों के अंदर एचएसवीपी व उपायुक्त कार्यालय पहुंच जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की अगली रणनीति तैयार की जाएगी। संभव है कि इसका इसका शिलान्यास समारोहपूर्वक किया जाए।
क्या है टी-फ्लाईओवर
टी-फ्लाईओवर परियोजना का डिजाइन करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बनाया है। नई डिजाइन में फ्लाईओवर हरियाणा नर्सिंग होम से शुरू होकर रेलवे रोड पर चर्च के पास तक जाएगा। बीच में टी-प्वॉइंट कमेटी चौक से कर्ण पार्क यानी बस स्टैंड तक दिया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 127 करोड़ रुपये प्रस्तावित की। जिसमें 111.88 करोड़ रुपये का सिविल वर्क है जबकि अन्य राशि बिजली और पानी की लाइनों को शिफ्ट करने में खर्च होगी। इसकी लंबाई 3.32 किमी होगी। इससे पहले इसकी लंबाई तो करीब 600 मीटर अधिक थी, लेकिन लागत भी 155 करोड़ रुपये से अधिक थी, लेकिन अमर उजाला की ओर से इस पर सवाल उठाए जाने के बाद इस परियोजना को पुनरीक्षित कर संशोधित किया गया था।
वाहनों के लिए बनेगी दो लेन
नौ मीटर चौड़े फ्लाईओवर पर वाहनों के लिए दो लेन होंगी। मार्ग पर पहले से ही मौजूद डिवाइडर पर इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों के अनुसार साढ़े पांच मीटर ऊंचे सेतुबंध लगाए जाएंगे। सिंगल पिलर फ्लाईओवर करीब 2.27 किलोमीटर लंबा और 1.5 किलोमीटर की विशेष लेन बस स्टैंड तक होगी। इसके बनने से रेलवे रोड के वर्तमान स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा।
क्या होगा फायदा
फ्लाईओवर बनने से रेलवे स्टेशन और हांसी चौक क्षेत्र की तरफ से हाईवे या बस स्टैंड की ओर जाने वाले व हाईवे से आने वाले वाहनों को बाजार से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। ट्रैफिक सीधे फ्लाईओवर पर चढ़ते हुए बाजार के ऊपर से गुजरेगा, जिन्हें बस स्टैंड की ओर जाना होगा, वे कमेटी चौक से विशेष लेन पर मुड़ जाएंगे। इससे शहर का यातायात काफी आसान हो जाएगा।