कोरोना की दूसरी लहर ने मरीजों को बुरी तरह उलझा रखा है। वायरस के अटैक ने इस बार मरीजों का दम घोंटा है। जबकि ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी से संक्रमितों की जान आफत पड़ी है। उधर, जिलों में स्वास्थ्य महकमे का पूरा स्टाफ भी इस वायरस के खात्मे और मरीजों की जान बचाने में शिद्दत से जुटा हुआ है। स्थानीय प्रशासन का फोकस इस वक्त पूरी तरह से कोविड मरीजों की जान बचाना और उन्हें वायरस की चुंगल से बाहर निकाल डिस्चार्ज करना है।
हालांकि इस काम के लिए जिलों में स्वास्थ्य विभाग के सामने जरूरी उपकरणों और मेडिकल व पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी सबसे बड़ी बाधा है। फिर भी जैसे-तैसे व्यवस्था कर स्वास्थ्य विभाग के अफसर कोविड मरीजों को बेहतर इलाज देने को प्रयासरत हैं। इस काम के लिए अस्पतालों में दूसरे विशेषज्ञ डाक्टरों की ड्यूटियां भी कोविड मरीजों के इलाज व निगरानी में लगा दी गई हैं।
इसी वजह से जीटी बेल्ट के सभी छह जिलों करनाल, कैथल, अंबाला, पानीपत, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कालेज में सर्जरियां और ओपीडी बंद कर दी गईं है। यहां सिर्फ सिजेरियन और ऑर्थो की आपातकालीन सर्जरी ही की जा रही है। जबकि ओपीडी भी सिर्फ इमरजेंसी मामलों में की जा रही है। इस वक्त अस्पतालों व मेडिकल कालेज सर्जरी व ओपीडी बंद करने का कारण भले ही संक्रमण फैलाव का खतरा बताया जा रहा है।
मगर स्वास्थ्य महकमे के सूत्रों का कहना है कि सारा स्टाफ तो कोविड ड्यूटी में लगा दिया गया है। इसलिए सर्जरी और ओपीडी के लिए विशेषज्ञ डाक्टर व स्टाफ ही नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी सर्जरी और ओपीडी के लिए भी बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए रूटीन सर्जरी और ओपीडी बंद हैं। इसी वजह से हालात यह हैं कि कोविड काल में जीटी बेल्ट के सभी छह जिलों में करीब 2090 सर्जरी लटकीं पड़ी हैं और 70 प्रतिशत ओपीडी बंद है। मरीजों का मर्ज बढ़ता जा रहा है और वे इलाज व सर्जरी के लिए अस्पतालों व मेडिकल कालेज के धक्के खा रहे हैं। मगर हालातों के मद्देनजर यहां उन्हें मिल रही है सिर्फ तारीख...।