- छठ महोत्सव में पहुंचे सीएम ने घाट पर पहुंच की पूजा, समिति को दिया 21 लाख का अनुदान, महिला शक्ति को साधना के लिए किया प्रणाम
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि छठ महापर्व हमें प्रकृति से प्रेम, जल व वायु को स्वच्छ रखने और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। सूर्य की उपासना की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति व आस्था का प्रकृति से गहरा जुड़ाव है। छठ पूजा के जरिए जीवन में सूर्य के प्रकाश के महत्व को बताया गया है। चढ़ते सूरज की पूजा हर कोई करता है, लेकिन इस पर्व में सूरज के हर रूप की पूजा होती है।
मुख्यमंत्री वीरवार को महा छठपर्व महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। सबसे पहले पश्चिमी यमुना नहर के किनारे पर स्थापित भगवान सूर्य देव मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद मुख्य मंच पर भगवान सूर्य देव के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। फिर यमुना नहर के छठ घाट पर अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और सबकी सुख समृद्धि के लिए कामना की।
मुख्यमंत्री का छठ पर्व सेवा समिति मंडल के अध्यक्ष सुरेश यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने समिति की ओर से रखी गई सभी मांगों को स्वीकार किया और अपने ऐच्छिक कोष से 21 लाख रुपये की राशि अनुदान के रूप में देने की घोषणा की। उन्होंने घाट पर साधना कर रही महिलाओं को भी प्रणाम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मूल रूप से पूर्वांचल में मनाया जाने वाला यह पर्व अब विभिन्न प्रदेशों की सीमाएं लांघकर देशभर में मनाया जाने लगा है। इस अवसर पर विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण, विधायक जगमोहन आनंद, विधायक राम कुमार कश्यप, विधायक योगेन्द्र राणा, विधायक भगवानदास कबीरपंथी, भाजपा जिला अध्यक्ष बृज गुप्ता, पूर्व मेयर रेनू बाल गुप्ता, जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सोहन सिंह राणा मौजूद रहे।
सीएम ने कहा कि इस पर्व से सूर्य के हर रूप की पूजा से यह संदेश जाता है कि हमें जीवन के उतार-चढ़ाव में समान भाव रखना चाहिए। छठ पूजा को सूर्य उपासना का सबसे पवित्र पर्व माना गया है। ऊर्जा और जीवन शक्ति के देवता सूर्य नारायण की पूजा इस पर्व के दौरान मनोकामना पूर्ति, समृद्धि और प्रगति प्रदान करने के लिए की जाती है। नवरात्र की तरह यह पर्व भी साल में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र मास में और दूसरी बार कार्तिक मास में आता है। छठ पूजा का संबंध हरियाणा से भी है। एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की थी। परंपरा को देखते हुए सरकार ने पश्चिमी यमुना कैनाल पर 4.48 करोड़ रुपये की लागत से स्नान घाट का निर्माण किया है। इसी घाट के सामने नहर के दूसरे किनारे पर भी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक और घाट बना है।
महिला शक्ति की पहचान पर मिला आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल परिवारों की महिलाएं बहुत मेहनती हैं और हर समय अपने परिवार के लिए कठोर साधना करती हैं। इसी साधना का परिणाम यह है कि छठ पूजा के दिन घंटों पानी में खड़े रहकर भगवान श्री सूर्य नारायण की पूजा करती हैं। मातृशक्ति की क्षमताओं को पहचानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया है। उन्होंने सरकार की श्रमिकों के लिए चलाई योजनाओं की भी जानकारी दी।