गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल में बिहार राज्य को दिया जा रहा प्रशिक्षण
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कई राज्यों में नकदी फसल माने जाने वाले गन्ने का रकबा घटने लगा है, जो चीनी उद्योग के लिए अच्छे संकेत नहीं है। इसे लेकर सरकारें भी चिंतित हैं। इसके लिए वैज्ञानिक किसानों को नवीनतम तकनीक सिखाएंगे ताकि गन्ने का रकबा न घटे।
अब कई राज्यों के किसानों, कृषि और ईख विभाग के अधिकारियों को नवीनतम तकनीक और रोगों से रोकथाम के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है, ताकि गन्ने के रकबे को बढ़ाया जा सके, जिससे पैदावार न घटे। गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल में मंगलवार से बिहार के गन्ना उत्पादक किसानों को वैज्ञानिकों ने नई तकनीकों, नई किस्मों और रोगों, कीटों की रोकथाम के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी है।
बिहार के मोतिहारी जिले के ईख विकास के उपनिदेशक कार्यालय के प्रधान लिपिक विनय कुमार सिंह की अगुवाई में आठ चीनी मिल क्षेत्रों के किसान व अधिकारी यहां पहुंचे। इनमें गोपाल गंज चीनी मिल, सिहावलिया, सुगोली, मझोलिया, नरकटिया गंज, हरी नगर, लौडिया, बगहा चीनी मिल क्षेत्र के किसान शामिल हैं। प्रशिक्षण की शुरुआत गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल के अध्यक्ष डॉ. एमएल छाबड़ा ने की। इस मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक रविंद्र कुमार, डॉ. एमआर मीना, डॉ. पूजा ने प्रशिक्षण की वस्तुस्थिति के साथ नई किस्मों की जानकारी दी। साथ ही चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र करनाल के समन्वयक डॉ. महा सिंह जागलान ने पहले सत्र में किसानों को बताया कि देश में करीब छह मिलियन हेक्टेयर रकबे पर गन्ने की खेती होती है।
हरियाणा में भी पहले 1.30 लाख हेक्टेयर में गन्ना होता था, लेकिन पिछले साल 1.05 लाख हेक्टेयर में बोया गया था। इसी तरह कई राज्यों में रकबा घट रहा है, लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है, पांच छह साल रकबा बढ़ता है तो चार पांच साल घटता भी है। इसके कई कारण होते हैं, किसान एक ही किस्म बोते रहते हैं, एक ही जैसी दवाएं लगाते रहते हैं, फसल विविधीकरण नहीं करते आदि कारण भी होते हैं, लेकिन नवीनतम तकनीक और रोगों की उचित देखभाल करके हमें गन्ने के रकबे को बढ़ाना है।
चार तरह के होते हैं कीट
डॉ. जागलान ने बताया कि कीट चार तरह के होते हैं, पहले जो जड़, फिर टॉप वेधक, रस चूसने वाले और चौथे पत्तियां चट करने वाले होते हैं। उन्होंने कहा कि जड़ में लगने वाला सबसे खास कीट दीमक है, जिसे दवाओं से खत्म करना मुश्किल होता है, लेकिन सावधानी व देखभाल से इसे रोका जा सकता है। इसकी रानी दीमक एक दिन में 30 से 50 हजार अंडे देती है, एक तरह से वह अंडे देने की मशीन होती है। इसमें क्लोरोपायरीफॉस 20 व 50 प्रतिशत या रीजेंट का प्रयोग किया जा सकता है। किसानों को फसल की अवस्था देखकर दवाई डालनी चाहिए। उन्होंने कई अन्य रोगों, कीटों व उनके लक्षणों के साथ साथ उन्हें रोकने के उपाय भी विस्तार से बताए। ये प्रशिक्षण 31 जनवरी दिनों तक चलेगा।