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Karnal News: रोजाना 10 घंटे पढ़ाई और चार साल की मेहनत से दीक्षा ने किया ऑल इंडिया टॉप

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रोजाना 10 घंटे पढ़ाई और चार साल की मेहनत से दीक्षा ने किया ऑल इंडिया टॉप - फोटो : रोजाना 10 घंटे पढ़ाई और चार साल की मेहनत से दीक्षा ने किया ऑल इंडिया टॉप
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- दीक्षा गोयल बोलीं - 10वीं की पढ़ाई के दौरान ही सीए बनने की ठानी थी, फाइनल में मिली सफलता
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर-13 निवासी दीक्षा गोयल ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया प्रथम रैंक हासिल कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान की ओर से आयोजित प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शुमार सीए की परीक्षा में 500 में से 486 अंकोंं के साथ शीर्ष स्थान पाना उनकी छह साल की मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है।
दीक्षा गोयल ने बताया कि 10वीं में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सीए बनना है। उसी समय से उन्होंने लक्ष्य के अनुसार पढ़ाई की दिशा तय कर ली। 12वीं के बाद उन्होंने पूरी तरह सीए की तैयारी पर फोकस किया और एक निर्धारित योजना के तहत आगे बढ़ती रहीं। परिवार ने हमेशा सकारात्मक माहौल दिया और हर कदम पर बेटी का हौसला बढ़ाया। परिणाम घोषित होते ही घर में खुशी का माहौल बन गया। माता-पिता ने इसे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि दीक्षा की लगन और अनुशासन ने यह मुकाम दिलाया है।
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इंटरमीडिएट में भी किया था टॉप
दीक्षा ने वर्ष 2023 में सीए इंटरमीडिएट परीक्षा में भी टॉप किया था। उस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया। फाइनल की तैयारी के दौरान उन्होंने पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए और भी सटीक रणनीति अपनाई।



रोजाना 10 घंटे की पढ़ाई
दीक्षा ने बताया कि फाइनल परीक्षा की तैयारी के दौरान उनकी दिनचर्या पूरी तरह पढ़ाई के इर्द-गिर्द रही। दिन से ही रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई, नियमित रिवीजन, मॉक टेस्ट और टाइम मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य व्यर्थ गतिविधियों से दूरी बनाए रखी लेकिन माइंड फ्रेश रखने के लिए 10 मिनट का समय सोशल मीडिया को दिया। उनका कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और माइंडसेट मजबूत हो तो कठिन से कठिन परीक्षा भी पास की जा सकती है। दीक्षा के पिता सुरेंद्र गोयल भवन निर्माण सामग्री का व्यवसाय करते हैं, जबकि मां रेखा गोयल गृहिणी हैं। दीक्षा की मां रेखा गोयल ने बताया कि बेटी बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही है। वह पल हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण था। चार साल की उसकी मेहनत रंग लाई है।
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युवाओं को दिया संदेश- सफलता शॉर्टकट से नहीं मिलती
दीक्षा ने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता शॉर्टकट से नहीं मिलती। स्ट्रक्चर वाइज तैयारी, स्पष्ट लक्ष्य, नियमित अभ्यास और कभी हार न मानने वाला रवैया ही आपको मंजिल तक पहुंचाता है। डिमोटिवेशन आएगा लेकिन अगर आप अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार हैं तो परिणाम जरूर मिलेगा।
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