- साल में पहली बार सुबह 316 पर पहुंचा एक्यूआई, दोपहर बाद 282 दर्ज
- रात 12 बजे के बाद और सुबह चार बजे तक ज्यादा रहता है प्रदूषण
गगन तलवार
करनाल। रात में जब कोई बाहर नहीं होता और अधिकारियों की टीम भी घरों में होती है, तब खेतों में पराली धधकती है। रात में करीब तीन घंटे में जलने वाली पराली से उठे धुएं के कारण अगले 21 घंटे तक हवा प्रदूषित रहती है, जिसका असर हर व्यक्ति की सेहत पर पड़ने लगा है।
इन दिनों हवा में सबसे ज्यादा 10 माइक्रोमीटर के धूल कण हैं। दिवाली पर आतिशबाजी की आड़ में जलने वाली पराली से करनाल का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) का रिकॉर्ड भी टूट चुका है, जिसका असर रविवार तक रहा। रविवार को भी सुबह 316 तक एक्यूआई दर्ज किया गया। हालांकि दोपहर बाद यह घटकर 282 पर पहुंच गया।
प्रदूषण विभाग के एक्यूआई मीटर के अनुसार, रात 11 बजे के बाद से स्थिति बिगड़ने लगती है। शनिवार की रात 11 बजे एक्यूआई में पीएम-10 का स्तर 307 पर पहुंचा। रात 12 बजे बढ़कर 344 पर पहुंचा। इसके बाद रविवार रात एक बजे 315 तक दर्ज किया गया। वहीं दो बजे 255 पर आया। जबकि ओवरऑल एक्यूआई रात 01 बजे से सुबह आठ बजे तक 316 तक दर्ज किया गया।
शनिवार को दिन में शहर का एक्यूआई 303 दर्ज किया गया। जोकि पिछले 10 दिनों में तीन गुना तक बढ़ा है। 10 दिनों में न्यूनतम 110 पर एक्यूआई दर्ज किया गया था। ऐसे में प्रदूषित हुई हवा सांस लेने योग्य नहीं बची। इससे सांस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। इधर, विशेषज्ञों ने प्रदूषण कम करने के उपाय अपनाने की अपील की है।
पीएम-10 और पीएम-2.5 की स्थिति
हवा की क्वालिटी पीएम-10 और पीएम-2.5 से मापते हैं। मात्रा प्रति घन मीटर में। एक घन मीटर एरिया में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 50 होनी चाहिए।
- पीएम-10 में 10 माइक्रोमीटर के धूलकण।
- पीएम-2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर के धूलकण।
किस समय कितना रहा पीएम-10
तिथि
समय
वैल्यू
02 नवंबर
रात 11 बजे
307
02 नवंबर
रात 12 बजे
344
03 नवंबर
रात 01 बजे
315
03 नवंबर
रात 02 बजे
255
प्रदूषण का कितना रहा स्तर
स्थिति
न्यूनतम
औसतन
अधिकतम
पीएम 2.5
123
316
389
पीएम 10
95
188
297
एनओ2
7.0
10
12
एनएच3
10
11
13
एसओ2
2.0
8.0
15
सीओ
50
89
116
ओजोन
31
32
59
रविवार का एक्यूआई भी 316 पार रहा। प्रदूषण कम करने के हम सभी को प्रयास करने चाहिए। अन्यथा स्थिति खराब होगी। आग लगने की घटनाओं पर हम भी निगाह रखे हुए हैं। टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। - शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग करनाल