जितेंद्र नरवाल
करनाल। शहर में रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले पथ विक्रेताओं को अब गली-गली घूमने की जरूरत नहीं होगी। इनको नगर निगम पक्का ठिकाना देने की तैयारी कर रहा है। इन्हें शहर में ही पक्के थड़े बनाकर दिए जाएंगे।
यहां बैठकर ये फल, सब्जी इत्यादि बेच सकेंगे। इसके लिए निगम शहर में सरकारी जमीन का सर्वे कर रहा है। इससे इनको स्थायी ठिकाना तो मिलेगा ही साथ में इनकी वजह से शहर में लगने वाली जाम की स्थिति से भी निजात मिलेगी।
नगर निगम इस परियोजना को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत पूरा करने जा रहा है। खास बात ये है कि पथ विक्रेताओं को स्वरोजगार देने के लिए निगम उन्हें 10 से 50 हजार रुपये तक का लोन भी उपलब्ध करा रहा है। जिसके ब्याज पर सब्सिडी तो है ही साथ में ऑनलाइन भुगतान पर कैशबैक भी मिलेगा।
योजना के कुल 13454 आवेदकों में से 10471 को योग्य माना गया। इनमें से 8285 को लोन दिलाया गया। इनमें से 8019 को 10 हजार रुपये की लोन की किस्त तक जारी की गई जबकि 784 को 50 हजार तक का लोन दिलाया जा चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि शहरी पथ विक्रेताओं को उनकी आजीविका या रोजगार प्रारंभ करने के लिए लघु ब्याज आधारित एक अनुदान ऋण सुविधा योजना है। इसके अंतर्गत प्रदेश के समस्त नगर निकायों के पथ विक्रेताओं रेहड़ी, फेरी वालों को लाभ दिया जाएगा। बैंक के माध्यम से इस लोन की अवधि दो साल तक होती है। इसका शहर में फेरी लगाने वालों व आसपास व ग्रामीण क्षेत्रों के स्ट्रीट वेंडर को भी लाभ मिलता है।
बिना गारंटी मिलेगा लोन, ब्याज होगा माफः योजना के अंतर्गत शुरुआत में 10 से 50 हजार का लोन दिया जा रहा है। इसे एक साल में 12 किस्तों में भरना होगा। ऋण में किसी प्रकार की कोई भी गारंटी नहीं देनी होगी। समय पर लोन भरने वालों को ब्याज में 09 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। डिजिटल लेनदेन पर सालाना 1200 रुपये तक कैशबैक के तौर पर प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। समय सीमा से लोन का भुगतान करने वालों को दूसरी बार बड़ा लोन दिया जाएगा।
प्रमाणपत्र अनिवार्यः ऐसे पथ विक्रेता जिन्होंने निगम से प्रमाण पत्र ले लिया हो, जिनका नाम सर्वे में छूट गया हो वे निगम से अनुशंसा पत्र जारी करवा सकते हैं।
पात्रों को अनुसूचित वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण, लघु वित्त, सहकारी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां समेत सक्षम वित्त संस्थाएं लोन देंगी। ये संस्थाएं आवेदन भरने, मोबाइल एप्लीकेशन व दस्तावेजों को अपलोड करने में मदद भी करेंगी। इसके लिए कोई भी पथ विक्रेता नगर निगम में संपर्क कर सकता है।