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लहसुन में पराली का मलचिंग के लिए हो रहा है इस्तेमाल : डॉ. विजय कौशिक

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- पराली प्रबंधन में इंद्री खंड के किसानों को मिल रहा पूरा सहयोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पराली प्रबंधन के तहत पराली के गट्ठे बनाने से जहां किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। वहीं इंद्री खंड में इस बार लगभग सात हजार एकड़ क्षेत्र में लहसुन लगाया गया है जिसमें मलचिंग के लिए पराली का खूब इस्तेमाल हो रहा है। इससे लहसुन में खरपतवार की समस्या कम होती है तथा मिट्टी में नमी काफी समय तक बनी रहती है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. विजय कौशिक ने बताया कि पराली का इस विधि से प्रयोग भी सराहनीय कदम है। खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्विनी कंबोज ने बताया कि इंद्री के किसानों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, यहां पर आगजनी की घटनाएं न के बराबर हैं। लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र में धान की कटाई उपरांत पराली प्रबंधन किया जा चुका है, लगभग खंड के आठ-नौ गांवों में अभी काम बाकी है। उम्मीद है कि आज के बाद भी किसान समझदारी का परिचय देते हुए पराली को न जलाकर उसका उचित प्रबंधन करेंगे।
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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र, उचानी के वैज्ञानिक डॉ. विजय कौशिक ने इंद्री के खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी कांबोज के साथ मिलकर पराली प्रबंधन अभियान के तहत कादराबाद, बुड़नपुर बांगर, पंजोखरा, गढ़ी जाटान, अंधगढ़, कैहरबा, जैनपुर साधान, तपरियों, छपरियों, खानपुर तथा सांतड़ी गावों का दौरा किया। खंड के काफी क्षेत्र में पराली प्रबंधन देखने को मिला, ज्यादातर पराली को मिट्टी में मिलाया गया है। इसके बाद किसानों ने बेलर से गट्ठे बनाकर बाहर निकलवाया है, कुछ किसानों ने पराली को अपने स्तर पर बाहर निकालकर रख लिया है।
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डॉ. कौशिक ने किसानों के द्वारा बुड़नपुर बांगर, गढ़ी जटान में तथा सांतड़ी में सीएचसी सेंटर के बेलर से बनाए गट्ठे के इकट्ठा करने की प्रक्रिया को सराहा और छपरियों में किसान के द्वारा पराली को मिट्टी में मिलाने के बाद भी कोने में पड़ी पराली को न जलाने के लिए प्रेरित किया।
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