करनाल। पति 72 वर्ष के हैं। पत्नी 70 वर्ष की। शादी को 47 साल हो चुके हैं। उच्च अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त बुजुर्ग ने तलाक के लिए अदालत पहुंचे हैं। कारण बताया कि साथ रहे लेकिन तालमेल नहीं बैठा पाए। कभी एक-दूसरे की सोच को सम्मान ही नहीं दिया। दोनों पिछले चार माह से अलग रह रहे हैं। एक ही बेटी है। इंजीनियर हैं। काउंसिलिंग के लिए पहुंचे बुजुर्गों के साथ बेटी भी थीं। उन्होंने बताया कि 47 साल के वैवाहिक जीवन लड़ते-झगड़ते बीता। जिम्मेदारी के कारण रिश्ते को संभाले रखा। पत्नी बोलीं कि वह तलाक नहीं चाहती हैं, लेकिन कई बार दूसरों की खुशी के लिए फैसले लेने पड़ते हैं। पति के चाहने पर तलाक लेने का फैसला लिया। चार महीने से अलग रह रहे हैं। जल्दी ही उनको तलाक मिल जाएगा।
जीवन की संध्या में संबंधों को संभाल नहीं पाने के मामले बढ़ रहे हैं। कोर्ट में रोजाना ही 40 साल से अधिक साथ बिता चुके दंपती तलाक के लिए पहुंच रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि इनमें से अधिकांश बुजुर्ग दंपती बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद अलग होने का फैसला ले रहे हैं। अधिवक्ता मोनिका शर्मा ने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान कई कारण सामने आ रहे हैं। अधिकांश मामलों में एक वाक्य दोहराया गया कि सोच नहीं मिलती, केवल जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए साथ निभा रहे थे। पहले ऐसे मामले काफी कम देखने को मिलते थे लेकिन अब लोग अधिक आ रहे हैं। उनके पास हर माह चार से पांच ऐसे मामले आते हैं।
तलाक के लिए आने वालों में उच्च पद से सेवानिवृत्त बुजुर्ग अधिक हैं। काउंसिलिंग की जाती है लेकिन अधिकांश मामलों में इससे फर्क नहीं पड़ता। तलाक के लिए आने वाले बड़ी उम्र के दंपती साथ रहने के मुद्दे पर बात ही नहीं करना चाहते। संवाद
पहले ही ले चुके होते हैं तलाक का फैसला
बुजुर्ग लोगों के तलाक लेने के बारे में यही कहा जा सकता है कि वे इस बारे में फैसला बहुत पहले ले चुके होते हैं। जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद उन्हें मौका मिलता है और वे तलाक के लिए केस फाइल कर देते हैं। विगत समय में रिश्तों में सामंजस्य की कमी हुई है। बच्चों के प्रति जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद उनको लगता है कि अब वे समझौता क्यों करें। -सौभाग्य सिंधू, मनोचिकित्सक, सिविल हॉस्पिटल
जिम्मेदारियों के निभाने पर टिका था रिश्ता
शहर की 64 साल की महिला ने अपने 68 साल के पति से तलाक लेने का केस दायर किया। महिला ने बताया कि वह अपने माता-पिता की मर्जी से शादी कर ससुराल में खुश तो रह रही थी लेकिन कहीं न कहीं पति की ओर से पूरा जीवन नजरअंदाज हुई। माता-पिता के लिए रिश्ते को निभाना ही ठीक समझा। उनके दो बच्चे हैं जो विदेश में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की शादी के बाद महसूस होने लगा कि उनका रिश्ता केवल जिम्मेदारियों को पूरा करने पर ही टिका हुआ था। इसलिए शादी के 42 साल बाद तलाक लेने का फैसला दोनों ने अपनी मर्जी से लिया।