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Karnal News: साही लकड़हारा सांग का मंचन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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घरौंडा। नई अनाज मंडी में चल रहे सांग का मंचन करते हुए सांगी संजय मलिक के निर्देशन में कलाकारों ने साही लकड़हारा सांग का मंचन किया। इसमें गरीब लकड़हारे से एक राजकुमारी की शादी की कहानी को भावपूर्ण अंदाज में प्रदर्शित किया गया।
कलाकारों ने दिखाया कि राजस्थान में राजा राय सिंह की दो पुत्रियां बेला और बीना थी। राजा ने अपने बगीचे के बाहर बोर्ड पर लिख दिया था कि जीवन में जो बेफिक्र होता है वह खुशनसीब होता है। जब बीना ने अपने पिता का लिखा हुआ बोर्ड पढ़ा तो बीना ने उसके नीचे लिखा कि बेफिक्र से तो पशु भी पेट भर लेते हैं पर वे खुश नसीबी प्राप्त नहीं कर सकते। नीचे ये भी लिखा कि शुभ कर्मों से ही खुशनसीबी प्राप्त होती है।
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अगले दिन जब राजा ने बोर्ड को पढ़़ा और पूछा कि ये किसने लिखा है तो राजा की पुत्री बीना ने अपने पिता से कहा कि इसे मैंने लिखा है। राजा ने अपनी पुत्री से कहा कि जो मैंने लिखा है वह सही है, लेकिन बीना अपने लिखे हुए को सही बता रही थी। इस बात से खफा राजा राय सिंह ने अपनी पुत्री बीना से कहा कि मैं तुम्हारी खुशनसीबी देखना चाहता हूं, यही नहीं खफा राजा ने एक कंगाल लकड़हारे के साथ बीना की शादी कर दी। वह लकड़हारा राजा जोधानाथ का पुत्र था। जिसका नाम शाही लकड़हारा रखा गया। जब शाही लकड़हारा छह वर्ष का हुआ तो उसकी माता रानी रुपानी की भी मृत्यु हो गई। बाद में जब शाही लकड़हारा बड़ा हुआ तो वह राजस्थान के माधवपुर में लकड़ी बेचकर गुजारा करने लगा। इस अवसर पर राज सिंगला, धीरज भाटिया पुष्कर टक्कर, सुरेंद्र सिंगला, कुलदीप कैमला, अशोक भटनागर, डॉ रमेश शर्मा, देवेंद्र धीमान, विनोद गोयल हरी राम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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