बिजली व्यवस्थाओं में सुधार के लिए बिजली निगम की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से शुरू किया गया आर-एपीडीआरपी (रिस्ट्रक्चर्ड-एक्सलेरेटिड पावर डेवलपमेंट एंड रिफोर्म) प्रोजेक्ट प्रथम चरण में ही फेल हो गया है। निगम द्वारा इस स्कीम के तहत ट्रांसफार्मर वाइज बिजली चोरी का पता लगाने के लिए ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगाए थे, लेकिन मीटर लगाने के तीन साल बाद भी निगम आज तक उन मीटरों की रीडिंग तक नहीं ले सका है। निगम की लापरवाही की वजह से कई ट्रांसफार्मरों से तो मीटर ही गायब हो चुके हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी निगम बिजली व्यवस्थाओं में सुधार नहीं कर सका है।
बिजली व्यवस्थाओं में सुधार के लिए निगम द्वारा वर्ष 2014 में एचसीएल कंपनी को टेंडर जारी किए थे। कंपनी द्वारा एपीडीआरपी योजना को दो चरणों में शुरू किया था, जिसके पहले चरण में कंपनी द्वारा बिजली चोरी रोकने के लिए ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगाए थे। निगम द्वारा इस प्रोजेक्ट की शुरुआत घरौंडा और सिटी डिवीजन से शुरू कर 4347 ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगाए थे। इनपर निगम द्वारा करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन डीटी मीटर लगवाने के बाद निगम आज तक उन मीटरों की रीडिंग तक लेने की जहमत नहीं उठाई है। आलम यह है कि कई ट्रांसफार्मरों पर लगे मीटर खराब हो चुके हैं तथा कई जगह से मीटर गायब मिले हैं। निगम की लापरवाही से इस 70 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
क्या है आर-एपीडीआरपी स्कीम
बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए निगम द्वारा आर-एपीडीआरपी (रिस्ट्रक्चर्ड- एक्सलेरेटिड पावर डिवेल्पमेंट एंड रिफोर्म) योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य बिजली की जर्जर हालत के ढांचे को व्यवस्थित कर बिजली चोरी रोकना था। शहर की 33 केवी व 11 केवी लाइनों के कंडक्टर बदलकर उनकी जगह पर एबी केबल लगाना। ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगाकर ट्रांसफार्मर वाइज लाइन लॉस का रिकॉर्ड दर्ज करना व सब डिवीजनों में उपभोक्ताओं को सभी सुविधाएं आनलाइन मुहैया करना था। निगम द्वारा कुछ हद तक उपभोक्ताओं को बिलिंग की ऑनलाइन सुविधा प्रदान की है, लेकिन शहर से जर्जर तारों के जाल व बिजली चोरी पर कोई रोक नहीं लगी है। कंपनी इसे अपना पहला चरण बता रही है। लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से ट्रांसफार्मरों पर लगे डीटी मीटर दूसरे चरण की शुरुआत से पहले ही गायब हो चुके हैं।
पहले चरण की ऑनलाइन सुविधाएं भी अधूरी
निगम द्वारा एपीडीआरपी प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेवारी एचसीएल कंपनी को दी है। कंपनी निगम में ऑनलाइन बिलिंग को प्रोजेक्ट का पहला चरण बता रही है, जबकि योजना के मुताबिक ऑनलाइन सेवाओं में उपभोक्ताओं को बिल तैयार होने की सूचना से लेकर बिल भरने व बिजली के अघोषित कटों की जानकारी मोबाइल या ईमेल पर देने का प्रावधान है, लेकिन तीन साल बीतने व 70 के खर्च के बाद भी उपभोक्ताओं को अभी तक ये सुविधाएं नहीं मिली हैं।
सवा लाख उपभोक्ताओं को निगम की स्मार्ट सुविधाओं का इंतजार
निगम द्वारा आज से तीन वर्ष पहले हजारों रुपये सर्कल चार्ज के इजाफे के साथ शुरू हुई एपीडीआरपी स्कीम से मिलने वाली स्मार्ट सुविधाओं का इंतजार करनाल व घरौंडा सिटी डिवीजन के करीब सवा लाख उपभोक्ता हैं, लेकिन पहले ही चरण में एपीडीआरपी स्कीम के फ्लॉप होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। गांव में लो वोल्टेज व बिजली चोरी से निजात दिलाने के लिए शुरू की गई पीलर बॉक्स मीटर योजना भी पहले ही चरण में फ्लॉप हुई है। इसी वजह से निगम घाटा आज 34 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसका परिणाम प्रदेश में बिजली के दाम बढ़े हैं।
वर्जन
जिले में एपीडीआरपी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सभी सब डिवीजनों में उपभोक्ताओं का डाटा आनलाइन कर दिया गया है। जल्द ही उपभोक्ताओं का इस योजना की अन्य सुविधाएं भी मिलने लगेंगी। शहर के जिन ट्रांसफार्मरों पर लगे डीटी मीटर खराब हैं, उनको भी बदला जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर उपभोक्ताओं की बिजली संबंधित कोई परेशानी नहीं रहेगी।
-जेके कांबोज, एसई, बिजली निगम करनाल।