शनिवार को तीन कृषि कानूनों के विरोध स्वरूप संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जिलेभर के सभी नेशनल एवं स्टेट हाइवे की रफ्तार तीन घंटे के लिए ठहर गई। किसानों ने घोषित 11 स्थानों की बजाए 14 स्थानों पर मुख्य मार्गों पर बेतरतीब ढंग से वाहनों को खड़ा कर जमा लगाकर धरना दिया। सरकार विरोधी नारेबाजी कर कृषि कानूनों को रद करने की मांग की। वहीं पुलिस प्रशासनिक प्लान के विभिन्न मार्गों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया।
नए और ग्रामीण रास्ते होने के कारण वाहन चालकों को भटकना पड़ा। जिससे आमजन को भारी असुविधा का सामना करना, क्योंकि पांच किलो मीटर दूरी तय करने को उन्हें 10 से 15 किमी चलकर गंतव्य स्थान को पहुंचना पड़ा। हालांकि भारी वाहन हाइवे पर ही किनारे लंबी कतारों में खड़े नजर आए। दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक व्यस्ततम हाइवे सूने नजर आए। हालांकि किसानों ने एंबुलेेंस आदि इमरजेंसी वाहनों को निकलने दिया। जिलेभर में कहीं कहीं हल्की नोकझोंक के अलावा सभी स्थानों पर चक्काजाम शांतिपूर्ण रहा।
बंदी को करनाल जेल छोड़ने आई बागपत पुलिस को किसानों ने वापस लौटाया
घरौंडा/मधुबन। जीटी रोड स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर पुलिस के जवान व किसान आमने-सामने हो गए। पुलिस जवानों को किसानों का विरोध सहना पड़ा और वाहन सहित पीछे मुड़ना पड़ा। शनिवार को किसानों ने यहां तीन घंटे जाम लगाए रखा। दोपहर 1.10 बजे पानीपत की ओर से करनाल सीआईए पुलिस की गाड़ी पहुंची। किसानों ने गाड़ी को क्रास करने से मना कर दिया। गाड़ी से एक पुलिस कर्मचारी उतरा और गाड़ी निकलवाने का आग्रह किया। उधर, दूसरी गाड़ी उत्तरप्रदेश बागपत पुलिस की थी जो दोपहर 1.50 बजे पहुंची। इस गाड़ी में एक आरोपी को करनाल जेल में छोड़ने के लिए जा रहे थे। विरोध के चलते जवान अपनी गाड़ी को वापिस ले गए। इस दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में आ गई। किसानों ने पुलिस की गाड़ी पीछे हटाकर एंबुलेंस को निकाला।
असर : रोडवेज की 40 बसें रास्ते में रूकी, झेलना पड़ा नुकसान
मुख्यमार्गों पर पेट्रोल पंपों और ढाबा-रेस्तरां की कमाई भी 80 प्रतिशत कम रही
करनाल। शनिवार को तीन घंटे के लिए जिले में प्रमुख मार्गों पर किसानों ने धरना दिया। ऐसे में यह सभी मार्ग तीन घंटे के लिए पूरी तरह से सुनसान रहे। धरने की पूर्व सूचना के चलते इन रास्तों पर जहां आमजन की आवाजाही कम रही। वहीं, पुलिस की ओर से जो लगाए गए डायवर्जन से भी इन रास्तों पर ट्रैफिक का रश कम दिखाई दिया। हालांकि जैसे ही दोपहर तीन बजे के बाद धरना खत्म हुआ तो एकाएक बढ़े ट्रैफिक रश से कुछ मार्गों पर जाम की स्थिति भी बनीं। नेशनल हाईवे को छोड़कर काछवा रोड, कैथल रोड, इंद्री रोड, मेरठ रोड पर दोपहर 12 से 3 बजे तक लॉकडाउन जैसे हालात दिखे। जबकि नेशनल हाईवे-44 पर अन्य दिनों के मुकाबले 20 प्रतिशत तक ट्रैफिक रहा। इसका असर, पेट्रोल पंप और होटल व रेस्तरां के सेल पर पर भी पड़ा। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, उनकी रोजाना की सेल करीब 80 प्रतिशत तक घटी। जबकि ढाबों और रेस्टोरेंट पर भी आम दिनों के मुकाबले महज 30 प्रतिशत तक ही कारोबार रहा। वहीं रोडवेज करनाल डिपू की भी करीब 40 बसों के पहिये थमे, इससे विभाग को करीब डेढ़ लाख रुपये का रेवेन्यू लॉस हुआ। इसी तरह जीटी रोड बेल्ट के अन्य जिलों के रेवेन्यू पर भी इतना ही असर पड़ा।
जानिए.. कहां कितना रहा असर--
रोडवेज: दूसरे डिपू की 70 बसें भी नहीं आई
किसानों के चक्का जाम का रोडवेज की कमाई पर भी असर पड़ा है। कुरुक्षेत्र-पानीपत के अलावा लोकल रुट असंध, इंद्री, शामली, ढांड और कैथल रूट पर चलने वाली 40 बसों के पहिये थमे, ये बसें जहां थी, उसी डिपो पर रूकी रही। वहीं इस तीन घंटे के समय में करनाल डिपो पर दूसरे डिपो से आने वाली 70 से ज्यादा बसों का स्टॉप होता है। इन बसों का भी ठहराव नहीं हुआ। रोडवेज के करनाल डिपू के ड्यूटी इंस्पैक्टर रवि शंकर के अनुसार, सुबह से सवारियों की संख्या भी कम थी। ऐसे में डेढ़ लाख रुपये का रेवेन्यू लॉस है। रोजाना 9 लाख रुपये का रेवेन्यू 156 बसों के अलग-अलग रूटों पर दौड़ने से आता है। शनिवार को रेवेन्यू सवा 7 लाख रुपये के आस-पास रहा। इतना रेवेन्यू लॉस अन्य जिलों में भी हुआ है।
पेट्रोल पंप: एनएच के 40 समेत जिले के 150 पंप पर नहीं दिखे ग्राहक
जिला पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पास जिले के 150 पेट्रोल पंप पंजीकृत हैं। इनमें से 40 नेशनल हाईवे-44 पर और शेष जिले के सभी स्टेट हाईवे और शहर के अंदर हैं। तीन घंटे के चक्का जाम के आह्वान के चलते सुबह से ही ट्रैफिक शनिवार को कम रहा। ऐसे में इन पंपों की सेल भी घटी है। नेशनल हाईवे झंझाड़ी पेट्रोल पंप के संचालक वरूण मराठा, कैथल रोड पंप के संचालक सूर्या, काछवा गांव के नजदीक पंप के संचालक दलजीत के अनुसार, उनकी सेल सुबह से दोपहर बाद तक अन्य दिनों के मुकाबले 20 प्रतिशत ही रही।
ग्राहक भी कम ही दिखे
किसानों के चक्का जाम का असर नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के ढाबा और रेस्टोरेंट पर ज्यादा पड़ा। शहर के अंदर चल रहे ढाबा और रेस्टोरेंट पर इसका असर ना के बराबर ही दिखाई दिया। कर्णलेक के पास स्थित ढाबा के संचालक अंकित, विवेक और शाम मुरारी व नमस्ते चौक पर रेस्तरां के संचालक दिलबाग का कहना है कि उनके पास ग्राहकों 30 प्रतिशत सीटिंग ही शनिवार को शाम तक रही। जबकि वीकेंड के कारण अन्य दिनों में काम ठीक रहता है।
हरियाणवी गाना किया लांच
घरौंडा। हरियाणवी गायक अनिल धनौरी ने बसताड़ा टोल पर धरने पर बैठे किसानों का रागिनी के माध्यम से मनोरंजन किया। इस मौके पर उनका नया गाना ‘हक लेंगे’ लांच किया गया। गायक ने कहा कि देशभक्ति भरे गानों में रंग अलग ही होता है।
कांग्रेसी भी पहुंचे धरने पर
घरौंडा। कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों के धरने पर पहुंचे। हालांकि किसानों ने किसी राजनीतिक दल के नेता या कार्यकर्ता को मंच व माइक नहीं दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरेंद्र राठौर, पूर्व विधायक नरेंद्र सांगवान, जिला संयोजक त्रिलोचन सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नरवाल, दिनेश सेन, रमेश सैनी व अन्य धरने पर पहुंचे। मर्दानी फाउंडेशन की पदाधिकारी एडवोकेट सोनिया तंवर, अमित तंवर के अलावा एडवोकेट जेपी शेखपुरा सहित कुछ अन्य वकील भी धरने पर मौजूद रहे।
जनवादी संगठन भी जाम में हुए शामिल
करनाल। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के सदस्य शनिवार को प्यौंत टोल सहित किसानों के चक्का जाम स्थलों पर पहुंचे। राज्य प्रधान कामरेड जगमाल सिंह व शीशपाल निसिंग में, किसान सभा के जिला प्रधान कामरेड सुखचैन सिंह व शिमला देवी, असंध में एडवोकेट कुलदीप राणा, रूपा राणा, बिजनेश राणा, घरौंडा टोल प्लाजा पर सीटू जिला सचिव जगपाल राणा, प्रधान सतपाल सैनी व ओपी माटा ने भाग लिया। इस मौके पर सुशील गुर्जर, जोगा सिंह, अशोक अरोड़ा, जरासो देवी, देशराज, सतपाल सैनी, मनोज, सुरिंद्र, राममेहर, डा. राजेंद्र सिंह व पार्वती तनेजा ने भी भागीदारी की।