कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में स्पेशलिस्ट डाक्टर छुट्टी पर चले गए हैं, वहीं, बदलते मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में आनन फानन में प्रबंधन ने 18 जूनियर रेजिडेंट डाक्टरों के हाथों में कालेज की कमान सौंपी है। स्पेशलिस्ट की गैर हाजिरी में अब जूनियर डाक्टर मरीजों का चेकअप कर रहे हैं। वहीं, डाक्टरों की कमी के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा, सर्जन नहीं होने के कारण लोगों के आपरेशन भी अटके हुए हैं और उन्हें एक एक माह की लंबी डेट दी जा रही है।
मेडिकल कालेज में रोजाना की ओपीडी करीब एक हजार की है, लेकिन अब मौसम बदलने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है और यह 2200 तक पहुंच गए हैं। डाक्टर कम होने के कारण मरीज ईलाज के लिए धक्के खा रहे मरीज प्रदेश सरकार को कोस रहे हैं।
एक फिजिशियन और एक बेहोशी का डाक्टरी
फजिशियन कालेज में दो डॉक्टर स्पेशलिस्ट हैं। एक डॉक्टर बीमारी के चलते लंबी छुट्टी पर है और दूसरे डॉक्टर विभिन्न प्रकार के मेडिकल बनाने में व्यस्त हैं। सर्जरी के लिए भी डॉक्टर नहीं है। डिलीवरी के दौरान एमरजेंसी सर्जरी हो रही हैं और बाकि किसी प्रकार की सर्जरी नहीं हो पाती। सर्जरी के मरीजों की संख्या रोजाना चार से पांच रहती है। अब इन मरीजों को अगले महीने की तिथि दी जाती है। बता दें कि कालेज में फिजिशियन के चार पद हैं और चार पद एनेस्थेसिया (बेहोशी) के पद हैं। इसके अलावा सितंबर, 2015 से रेडियोलाजिस्ट छुटट्ी पर चल रही हैं। अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए भी मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है।
बता दें कि कालेज में मात्र 30 डाक्टर हैं और इनमे से भी पिछले दिनों पांच डाक्टर यहां से तबादला करा चुके हैं, जबकि यहां पर 100 डाक्टरों की जरूरत है।
कालेज तो छोड़िये अब अस्पताल भी नहीं रहा
शहर में मेडिकल कालेज स्थापित होने के बाद अस्पताल भी नहीं रहा। मेडिकल कालेज और अस्पताल एक ही जगह चल रहे हैं। अलग-अलग होने पर मरीजों को बेहतर ईलाज मिलना तय है। मेडिकल कालेज से स्पेशलिस्ट डॉक्टर सरकारी नौकरी को अलविदा कर रहे हैं और करीब 18 जूनियर डॉक्टरों के हाथों में कमान आ गई है, जो ओपीडी के अलावा अन्य जगह लगा दिए हैं। ऐसे में जूनियर डॉक्टर नॉर्मल तौर पर दवाई व चैकअप कर पाते हैं और लेकिन बीमारी लंबी है तो इन डॉक्टरों की भी टेंशन बढ़नी तय है। मेडिकल कालेज के कर्मचारी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का बोझ कम करने की मांग उठाने में लगे हैं।
डाक्टरों पर कई काम, मरीज परेशान
मौजूदा समय में फिजिशियन डा. किरण गिरधर और डा. संजीव ग्रोवर हैं। बीमारी के चलते डा. संजीव ग्रोवर छुट्टी पर हैं। अब एक डा. किरण गिरधर हैं, जिनको भर्ती के लिए मेडिकल, अमरनाथ यात्रा जाने वालों के मेडिकल, एक्सटेंशन मेडिकल, खूंखार कैदियों का मेडिकल के अलावा वार्ड में एडमिट मरीजों का समय-समय पर चैकअप, ओपीडी, ट्रामा सेंटर में आने वाले एमरजेंसी को भी संभालने की ड्यूटी है। ऐसे में खांसी, बुखार, जुखाम, बीपी, शुगर के मरीज डॉक्टर के पीछे-पीछे घूमते रहते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर ओपीडी को संभाल नहीं पाती और जूनियर डॉक्टर उन्हें चैक करते हैं।
वर्जन
स्पेशलिस्ट डॉक्टर कम रह गए हैं। ऐेसे में जूनियर 18 डॉक्टरों को लगाया हुआ है। जो व्यवस्था है उसके मुताबिक मरीजों को बेहतर ईलाज देने की कोशिश रहती है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की जरूरत है और इनकी मांग मुख्यालय भेज दी है।
-डा. योगेश शर्मा, पीएमओ, मेडिकल कालेज करनाल।