पशु तस्करी रोकने के लिए जल्द ही पुलिस विभाग द्वारा प्रदेश में चार स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। चार से पांच जिलों का जोन बनकर उसका दायित्व पुलिस को सौंपा जाएगा, जिसमें प्रत्येक जिले से पुलिस कर्मियों को शामिल किया जाएगा।
तस्करों से निपटने के लिए पुलिस को बुलेट प्रूफ वाहन बी उपलब्ध कराए जाएंगे। शनिवार को करनाल के लघु सचिवालय में आए एडीजीपी वी. कामराज ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में पशु तस्करों का आतंक प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तस्करी के दौरान तस्कर पुलिस पर फायरिंग कर अपने मकसद को अंजाम देने के सफल हो जाते हैं। कामराज ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा किया जाने वाली स्पेशल टीमों के गठन के बाद पुलिस कर्मी भी तस्करों की फायरिंग का जवाब देने में सक्षम होंगे।
उन्होेंने कहा कि अब तस्करों द्वारा फायरिंग करने पर पुलिस को सोचना नहीं पड़ेगा, बल्कि पुलिस अपने जवाब में तस्करों पर फायरिंग करेगी। कामराजा ने बताया कि करनाल के मंगलौरा बार्डर के रास्ते तस्कर पशुओं को उतर प्रदेश सीमा से ले जाते हैं। अब जल्द ही मंगलौरा बार्डर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि पशु तस्करी करने वाले वाहनों की दूर से ही जानकारी हो सके। उन्होेंने बताया कि आने वाले दिनों में पुलिस विभाग द्वारा टेलीफोन नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर पशु तस्करों की सूचना दी जाएगी।
विभाग द्वारा बनाई जाने वाली टीम में प्रत्येक जिले से 20 से 25 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल किए जाएंगे। पशु तस्करी रोकने के लिए चार से पांच जिलों का एक जोन उन्हें दिया जाएगा। इस अवसर पर पुलिस कप्तान शशांक आनंद और अतिरिक्त उपायुक्त गिरीश अरोड़ा भी उपस्थित रहे।