फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्भपात के औजार रखने पर डॉक्टर दंपति के खिलाफ केस

Sat, 04 Jan 2014 11:29 PM IST
कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र के एक अस्पताल को बगैर रजिस्ट्रड कराए गर्भपात (एमटीपी) में उपयोग किए जाने वाले औजार रखने के मामले में शहर के डॉक्टर दंपति के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सीएमओ को दी गई रिपोर्ट के आधार पर हुई है।
विज्ञापन


पुलिस ने जिला के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ.शिव कुमार की शिकायत पर डॉक्टर दंपति के खिलाफ एमटीपी एक्ट-1971 की धारा 2-3-4-5 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को थानेसर शहर के नंदलाल ग्रोवर मेडिकेयर होम में अवैध ढंग से गर्भपात की सूचना मिली थी।

इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने छापामारी टीम का गठन किया था, जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ.केके शर्मा, एसएमओ डॉ.सुरेंद्र राणा, डॉ.सुनीता शर्मा, जिला दवा नियंत्रक रितू मेहला तथा एक पुलिस अधिकारी भी शामिल किया गया।
विज्ञापन


सीएमओ के मुताबिक मौके पर गर्भपात का कोई केस नहीं मिला, लेकिन अस्पताल से ऐसे कई औजार मिले हैं, जोकि गर्भपात के लिए प्रयोग किए जाते हैं। सीएमओ के मुताबिक कोई भी डॉक्टर बगैर रजिस्ट्रेशन ये औजार के नहीं रख सकता।

उन्होंने बताया कि जिस अस्पताल से यह औजार मिले हैं उसके संचालक डॉक्टर दंपति डॉ.गिरीश ग्रोवर व डॉ.अलका ग्रोवर बीएएमएस डॉक्टर हैं, जबकि इस श्रेणी के चिकित्सक ये औजार नहीं रख सकते, क्योंकि इन औजारों को रखने के लिए अस्पताल का रजिस्ट्रेशन होना लाजिमी है और इसकी अनुमति सीएमओ द्वारा दी जाती है।

वहीं इन औजारों का उपयोग डिप्लोमा गायनी लेडी डिपार्टमेंट या जिस एमबीबीएस डॉक्टर ने एमटीपी की ट्रेनिंग ली हो और ऐसे केस के लिए सीएमओ से अनुमति ली हो वही कर सकता है। शुक्रवार को गई छापेमारी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्पोर्ट मीमो और इंस्ट्रेक्शन रिपोर्ट दी थी, जिसमें बताया कि इस अस्पताल में एमटीपी के ये औजार मिले हैं। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि न तो यह अस्पताल रजिस्टर्ड है और ना ही डॉक्टर।  

2010 से 2013 तक लिंगानुपात में हुआ है सुधार
चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ.शिवकुमार के मुताबिक कुरुक्षेत्र में लिंगानुपात के मामले में स्थिति चिंताजनक थी। उन्होंने बताया कि जिला कुरुक्षेत्र में 2010 तक 1000 लड़कों पर 765, 2011 में 1000 पर 751, 2012 में 1000 पर 800 तक पहुंची, लेकिन जनवरी 2013 से लेकर दिसंबर तक यह संख्या 1000 लड़कों के मुकाबले 890 तक पहुंची है।   
 
झोलाछाप के खिलाफ भी चल रहा है अभियान
सीएमओ के मुताबिक जिला में प्राइवेट स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं जानलेवा साबित न हो इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए टीमें गठित की हैं। इनमें एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी जिला दवा नियंत्रक, जिला आयुर्वेद अधिकारी शामिल किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें