करनाल। कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की नींव बन सकते हैं। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश कर रही हैं किसान सोनिया, जिन्होंने चार साल पहले अपने घर के आंगन में बनाई गई एक छोटी सी क्यारी से हल्दी की खेती शुरू की थी। वर्तमान में सोनिया 250 गज के प्लॉट में हल्दी की खेती कर न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। खुद हल्दी उगाने से लेकर उसे पीसकर तैयार कर अन्य जिलों व राज्यों तक बेचने तक का कार्य कर रही हैं।
चार साल पहले सोनिया ने घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने घर के पास ही हल्दी उगाने का प्रयोग किया। शुरुआत में न तो उन्हें खेती का विशेष अनुभव था और न ही किसी बड़े निवेश की क्षमता। लेकिन सीखने की लगन और मेहनत ने रास्ता दिखाया। सोनिया ने बताया कि वह शादी से पहले अपने पिता के साथ खेत में जाकर किसानी किया करती थी, आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण केवल आठवीं तक ही शिक्षा पूर्ण की। लेकिन शादी के बाद पति के साथ आर्थिक सहारा देने के लिए घर पर ही खेती करनी शुरू की। उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती हैं और बेहतर ग्रामीण उद्यमी बन स्वयं के सपने भी पूरा करना चाहती है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने घरेलू हुनर से भी सशक्त और अपनी पहचान बना सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
हल्दी की खेती से आठ हजार रुपये प्रति माह आमदनी
सोनिया बताती है कि वह मिट्टी की तैयारी, बीज चयन, सिंचाई और प्राकृतिक खाद पर विशेष ध्यान देती हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर वे शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण हल्दी तैयार कर रही हैं। साथ ही बिना किसी मिलावट के शुद्ध हल्दी तैयार कर बेचती हैं। साथ ही गांव की चार से पांच महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि हर माह लगभग सात से आठ हजार की आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि भविष्य की योजना है कि हल्दी की खेती को अच्छे स्तर तक बढ़ा कर रोजगार बढ़ाया जाए।