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कोई बेटी कोई गर्भवती पत्नी से मिलने को बेकरार

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लाकडाउन में किसी की बेटी कहीं बाहर फंसी है तो कोई गर्भवती पत्नी के पास पहुंचने को बेकरार है, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह हैं। प्रवासियों को उनके घर भेजने की बात हो रही है तो करनाल के उन लोगों को वापसी लाने के लिए आनलाइन आवेदन भी मांगे जा रहे हैं। लेकिन हकीकत ये है कि आनलाइन आवेदन के सप्ताह बाद तक प्रशासन की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं दिया जाता। लोग सुबह लघु सचिवालय परिसर में डीसी और सीटीएम आफिस के बाहर पास लेने के लिए जमा होते हैं और शाम को फेल होकर वापस चले जाते हैं। हाल यह है कि परेशान लोगों की सुनने वाला कोई नहीं। प्रशासन की ओर से गेंद केंद्र के पाले में डालकर अपना पल्ला झाड़ा जा रहा है, जिसका खामियाजा लाकडाउन में फंसे हजारों लोगों को झेलना पड़ रहा है।
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गुरुग्राम में फंसी है बेटी, तीन बार किया आनलाइन आवेदन, सीटीएम ने आफिस से बाहर निकाला
सेक्टर-8 निवासी रवि बहल और नीता बहल की बेटी गुरुग्राम में है। 22 मार्च को वह गई थी, इसके बाद लाकडाइन हो गया। आज तक वह यहां नहीं आ पाई है। प्रशासन की ओर से उनको कहा गया कि आनलाइन अप्लाई करो, तीन बार अप्लाई किया। 18 अप्रैल, 27 अप्रैल और अब 3 मई को, लेकिन हर बार उनका पास रिजेक्ट कर दिया गया। सीटीएम के पास गए तो उन्होंने बात ही नहीं सुनी और आफिस से बाहर निकाल दिया। डीसी के पास जाते हैं तो तीन तीन घंटे बाहर खड़ा कर जवाब दिया जाता है कि वे नहीं मिलेंगे, मीटिंग में हैं। अब वे जाएं तो जाएं कहां, सीएम का हलका होते हुए भी यहां सुनने वाला कोई नहीं है? मेरी बेटी अकेली है और उसकी तबियत खराब हो रही है, पर हम लाचार हैं। सीएम तक को मैंने ट्वीट किया है, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
मेरी बेटी पूना में है, दो दिन से चक्कर लगा रहे हैं, समाधान तो दूर सुनने वाला कोई नहीं
शहरवासी राजेंद्र ने बताया कि उसकी बेटी पूना में फंसी हुई है। पास बनवाने के लिए वे दो दिन से चक्कर लगा रहे हैं। डीसी आफिस गये तो उन्होंने बताया कि सीटीएम आफिस जाओ, सीटीएम आफिस गए तो वहां से हुडा आफिस भेज दिया गया। अभी तक हमारी किसी ने समस्या भी नहीं सुनी, समाधान तो दूर की बात है। बेटी का रोजाना फोन आता है कि पापा ले जाओ यहां से। हम तमाम कोशिश करके थक चुके हैं। आखिर करें तो क्या करें।
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मेरी पत्नी बिहार में है, लेकिन कोई परमिशन नहीं दे रहा
गांव अरड़ाना निवासी सतीश कुमार का कहना है कि उसकी शादी बिहार के पटना में हो रखी है। मार्च माह में उसकी पत्नी अपने घर गई थी। वह गर्भवती है। वह ई दिशा पोर्टल पर आवेदन कर चुका है, लेकिन तीन दिन के बाद भी इस पर कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। सीटीएम से लेकर हुडा आफिस और डीसी आफिस दो दिन से चक्कर लगा रहे हैं, कोई भी अधिकारी बात सुनने को तैयार नहीं है। सभी कहते हैं आनलाइन आवेदन करो, लेकिन इसके बाद होता कुछ नहीं है। वह तीन दिन से पास की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन करनाल में सुनने वाला कोई नहीं है।
प्रवासी मजदूरों का मामला जिला प्रशासन नहीं केंद्र देखता है : डीसी
प्रवासी मजदूरों को वापस घर भेजने का मामला जिला प्रशासन नहीं देखता है, केंद्र सरकार से ही इसकी मंजूरी मिलती है। जहां तक जरूरी सेवाओं की बात है तो इसके लिए आटो अप्रूवल मिल जाती है। -निशांत कुमार यादव, डीसी, करनाल।
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