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किसका बायोमेडिकल वेस्ट फेंका है, अब बार कोड से चलेगा पता

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कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज और जिला नागरिक अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जिला अस्पताल ने पहल की है। नागरिक अस्पताल की तरफ से अब यहां से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट की पैकिंग पर बाकायदा बार कोड लगाए जाएंगे। इसके बाद इसे वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर ही डाला जाएगा। प्लांट पर बार कोड का मिलान किया जाएगा। इससे संबंधित ठेकेदारों पर भी नकेल कसी जाएगी और उसके कर्मचारी इस वेस्ट को प्लांट के अलावा कहीं बाहर नहीं फेंक सकेंगे। इसके साथ ही नए सिस्टम से यह भी पता चलेगा कि अस्पताल से कितना बायोमेडिकल वेस्ट निकला है। वह बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट में कितना पहुंचा है।
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गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों पहले बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर नागरिक अस्पताल और कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज आमने-सामने हो गए थे। नागरिक अस्पताल की डस्टबिन में बायो मेडिकल वेस्ट कोई फेंककर चलता बनता था। तो नागरिक अस्पताल के अधिकारी कहते थे कि यह बायोमेडिकल वेस्ट कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज का है। वहीं कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के अधिकारी कहते थे कि यह नागरिक अस्पताल का ही बायो मेडिकल वेस्ट है। यह मामला कई दिनों तक चला। इस मामले में खुद डीसी विनय प्रताप सिंह को दखल करना पड़ा। इस मामले में बाकायदा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने मेडिकल कॉलेज को नोटिस भी थमाया था। बाद में डीसी ने इस मामले में एडीसी के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की थी, जिसे निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का निष्तारण कैसे किया जाता है।
अलग-अलग रंग के डस्टबिन में डालना होता है वेस्ट
अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग रंग की डस्टबिन में डालना होता है। पीले रंग की डस्टबिन में मानव अंग, महरम पट्टी, कॉटन, प्लास्टर, ब्लड बैग, रक्त से संक्रमित कपड़े, लाल रंग की डस्टबिन में संक्रमित प्लास्टिक अपशिष्ट जैसे प्लास्टिक, ड्रिप सेट, मूत्र बैग आदि, नीले रंग के डस्टबिन में दवाइयां की खाली शीशी, इंजेक्शन के एम्यूल, पैथोलॉजी की जांच की स्लाइड, टेस्ट ट्यूब, ग्रे रंग के डस्टबिन में नुकीले अपशिष्ट जैसे सुई, ब्लेड व संक्रमित धातुएं। हरे रंग के डस्टबिन में फल, सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना आदि।
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मेडिकल कॉलेज में मिला था बायो मेडिकल वेस्ट
अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर एक बड़ा खेल खेला जाता है। सामान्य कचरे में बायो मेडिकल वेस्ट डाला जाता है। इस तरह का मामला पहले नागरिक अस्पताल में सामने आया था तो फिर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में सामने आया। वहां भी सामान्य कचरे में बायो मेडिकल वेस्ट पाया गया। इस मामले में जब डीसी ने संज्ञान लिया तो समाधान हुआ।
डीसी ने बनाई हुई है एक कमेटी
मेडिकल कॉलेज में बायो मेडिकल वेस्ट मिलने के मामले के बाद डीसी ने एक कमेटी का गठन किया है। जिनको निर्देश हैं कि वह जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और 10 प्राइवेट अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट बनाए कि इन अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट के लिए क्या व्यवस्था की हुई है। टीम जांच कर रही है। इस जांच में ही खुलासा होगा कि आखिर वेस्ट को लेकर किस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है।
खुले में डालने से हो सकती हैं बीमारियां
बता दें कि बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में डालने से कई प्रकार की बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। इससे पशुओं में भी बीमारियां फैलने का डर रहता है, क्योंकि कई बार पशु भी कचरे में मुंह मार लेते हैं और इससे सुइयों समेत अन्य नुकीली और जहरीली चीजें उनके अंदर चली जाती हैं। इससे पशुओं की मौत भी हो जाती है। बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर सभी अस्पतालों द्वारा टेंडर दिया जाता है, लेकिन कई बार संबंधित एजेंसी इस वेस्ट का नियमों के अनुसार निष्तारण नहीं करती है और केवल खानापूर्ति करके इसे खुले में डाल देते हैं।
अस्पताल से जो बायो मेडिकल वेस्ट निकलेगा उसे पैक करके उस पर बार कोड लगाकर भेजा जाएगा। ताकि पूरी जानकारी रहे कि मेडिकल कॉलेज से कितना बायो मेडिकल वेस्ट निकाला है और वह प्लांट पर पहुंचा की नहीं। इससे लाभ यह रहेगा कि कहीं संबंधित एजेंसी प्लांट के अलावा बाहर तो नहीं इस वेस्ट को डाल रही है। साथ ही यह भी जानकारी मिल सकेगी कि कितना वेस्ट निकला है। - डॉ. विरेंद्र सिंह यादव, पीएमओ, करनाल।
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