डेढ़ माह से बंद पड़े सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को सॉलिड स्पॉट की दरकार है। हालांकि, न तो यह कार्य कंपनी कर पा रही हैं और न ही नगर निगम। आलम यह है कि रोजाना शहर से निकलने वाला करीब 124 टन कचरा वहां पर डाला जा रहा है। जिससे वहां अनेकों बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है।
कचरे का मैनेजमेंट नहीं होने से आसपास के पास में रहने वाले गांवों के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। गांव शेखुपुरा व नगला फार्म के लोगों का कहना है कि हमारे हिस्से 24 घंटे बदबू और मक्खियां ही मक्खियां हैं। उधर, प्लांट को चलाने को लेकर न तो निगम गंभीर है और न ही कंपनी, ऐसे में स्मार्ट सिटी की दौड़ और जनवरी में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजे पहले से ही शहरवासियों को दिख रहे हैं।
कंपनी ने सरकार से मांगा कुछ समय
बता दें कि प्लांट पर बिजली निगम का लाखों रुपये बकाया होने के कारण निगम द्वारा कनेक्शन काटा गया है। प्लांट बंद होने को लेकर नगर निगम ने प्लांट चलाने वाली कंपनी को नोटिस जारी किया था, साथ ही उनका वर्क आर्डर कैंसिल कराने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भी लिखा था। हालांकि, अब कंपनी ने प्लांट चलाने पर सहमति जताई है, जिस पर कुछ समय की मांग की है। उधर प्लांट बंद होने के कारण प्लांट पर कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे बद्बू उठ रही है और आसपास के क्षेत्र में बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
हर माह चार लाख खर्च, आमदनी एक भी नहीं
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट वर्ष-2012 में बनकर तैयार हुआ था। मार्च, 2013 में इसमें बिजली का कनेक्शन दिया गया। इसे बनाने में मुंबई की हाइड्रो एयर टेक्टोनिक्स कंपनी ने 53 प्रतिशत राशि के रूप में करीब 16 करोड़ रुपये की राशि खर्च किए थे। वहीं, सरकार ने 47 प्रतिशत राशि वहन की थी। सरकार व मुंबई की कंपनी के बीच 30 साल का करार हुआ था, लेकिन करीब चार साल में कंपनी के अधिकारी हार मान गए हैं। प्लांट चलाने में हर महीने करीब चार लाख रुपये खर्च आता है। फरवरी, 2016 में नगर निगम ने प्लांट चला रही कंपनी को 8.61 लाख रुपये बिजली का बिल भरने के लिए उधार दिए थे। अब फिर से बिजली बिल नहीं चुका पाने के कारण प्लांट का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। कंपनी की ओर से लगातार खर्च किया गया, लेकिन आज तक यहां पर बने बनाई जैविक खाद को कोई खरीदार नहीं मिल पाया है। इस कारण कंपनी के पास खर्च ज्यादा है और आमदनी कम है।
रोजाना निकलता है 124 टन कचरा
शहर की आबादी करीब साढ़े चार लाख है। कुल 20 वार्ड हैं। अधिकारियों की मानें तो इनमें से रोजाना करीब 124 टन कचरा निकलता है। इस कचरे को वाहनों के माध्यम से मेरठ रोड स्थित प्लांट में भेजा जाता है। इनमें से 104 टन गलनशील कचरा होता है, जबकि 20 टन बिना गलने वाला कचरा होता है। पिछले डेढ़ माह से प्लांट बिजली कनेक्शन कटने के कारण बंद है। निगम का उस पर लाखों रुपये बिल बकाया है। ऐसे में निगम द्वारा घरों से निकलने वाले कचरे को रोजाना प्लांट में भेजा जा रहा है और खुले में डाला जा रहा है। उसका मैनजमेंट नहीं होने के कारण वहां पर बद्बू फैल रही है और आसपास के ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने दी चेतावनी, सड़कों पर उतरेंगे
मेरठ रोड पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के पास बने नगला फार्म व शेखपुरा के लोगों ने निगम को चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इसका समाधान नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। सुशील, दिनेश, बीर सिंह आदि ने बताया कि प्लांट के कारण बदबू आती है, इसके साथ ही गांव में मच्छर व मक्खियों ने कब्जा जमा रखा है। वे कई बार इसकी शिकायत प्रशासन को कर चुके हैं, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। अगर जल्द ही इसे चालू नहीं किया तो वे सड़कों पर उतरेंगे।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को नियमित रूप से चलाने के लिए हाइड्रो एयर टेक्टोनिक्स कंपनी को नोटिस के बाद सरकार को वर्क आर्डर रद करने के लिए लिखा गया था। अब कंपनी ने प्लांट को चलाने के लिए कुछ और समय की मांग की है। निगम की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि प्लांट को चलाया जाए। इस सप्ताह इस पर गंभीरता से एक्शन लिया जाएगा।
धीरज कुमार, ईओ, नगर निगम, करनाल
कंपनी प्लांट को चलाने के लिए कोशिश कर रही है। जैविक खाद को लेकर कई स्थानों पर बात हुई है, जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। खर्च ज्यादा होने के कारण और आमदनी नहीं होने के कारण प्लांट बंद है। एक-दो दिन में ही प्लांट को चलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
राजीव गिरधर, मैनेजर, वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट।