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प्रिंसिपल के समर्थन में उतरे सामाजिक और शैक्षणिक संगठन

Fri, 08 Nov 2013 04:22 PM IST
करनाल
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इंद्री के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल पर साढे़ तीन साल की बच्ची से दुराचार के आरोप के खिलाफ शहर के सामाजिक संगठन, सीबीएसई स्कूलों की एसोसिएशन सहोदय स्कूल कांपलेक्स, स्कूलों के संचालक और प्रिंसिपल और व्यापार मंडल तक के पदाधिकारी एकजुट हो गए हैं।
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 इन संगठनों और संस्थाओं से जुडे़ पदाधिकारियों का कहना है कि प्रिंसिपल बेकसूर है। उसे किसी साजिश के तहत फंसाया गया है।

इन लोगों ने कहा कि मामले की सच्चाई जानने के लिए और प्रिंसिपल, स्कूल स्टाफ और शिकायतकर्ता पक्ष के लोगों का पॉलीग्राफी या नारको टेस्ट करवाया जाए। यह बात सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मानव सेवा संघ के प्रांगण में पत्रकारों से कही।  

एसपी को लिखा पत्र, जांच की मांग
सामाजिक संगठनों ने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए वीरवार को पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखा।  पुलिस अधीक्षक को पत्रदेने के लिए लोग जिला सचिवालय पहुंचे, लेकिन एसपी की अनुपस्थिति में इन्होंने पत्र डीएसपी मुख्यालय जोगिंद्र राठी को सौंपा।
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 इसके अलावा उन्होंने मौखिक तौर पर तमाम हालात का विस्तार से जिक्र किया। पत्र में लोगों ने प्रिंसिपल के स्कूल के पूरे टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के साथ शिकायतकर्ता पक्ष के लोगों का पॉलीग्राफी या नारको टेस्ट कराने की मांग की है।

लोगों ने बताया कि वे लोग प्रिंसिपल को पिछले लंबे समय से जानते है। वह बुद्धिजीवी, अच्छा शिक्षक, समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का धनी, साहित्यकार, कवि, लोगों का दुख दर्द को समझने वाला और जिम्मेदारी व्यक्ति है। वहीं, लोगों ने कहा कि यदि जांच में प्रिंसिपल को दोषी पाया जाता है तो उसे फांसी की सजा दी जाए। 

लेकिन यदि शिकायतकर्ता पक्ष दोषी पाया गया या फिर कोई अन्य षड़यंत्र जांच में सामने आता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ भी ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाए।

‘दोषी नहीं है प्रिंसिपल’
सहोदय स्कूल कांपलेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा ने मीडिया के सामने कहा कि आरोपी प्रिंसिपल तीन साल तक उनके स्कूल में बतौर अध्यापक सेवा दे चुका है।

कभी कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया, जिसमें उसके चरित्र पर उंगली उठी हो। अपना विचार मंच के अध्यक्ष पीडी कूपर ने कहा वह उनके संगठन से जुडे़ हैं। ऐसा कोई मामला नहीं है। इसके अलावा भी कई संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रिंसिपल के चरित्र को साफ सुथरा बताया।

मामला पेचीदा है : पन्नू
निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने पत्रकारों से बात करते कहा कि मामला पेचीदा है। घटना के दिन पौने 12 बजे प्रिंसिपल करनाल में पॉश पुस्तकालय में शहर के लोगों के साथ था। पुलिस की कॉल डिटेल के अनुसार गौतम ने सवा 12 बजे इंद्री में प्रवेश किया और स्कूल पहुंचा।

उसने स्कूल में दीपावली पर आयोजित समारोह में हर कमरे में बनाई गई रंगोली का निरीक्षण किया। करीब डेढ़ बजे के बाद वह फ्री हुआ। बस के चालक भी कह रहे हैं कि बच्ची को करीब 12 बजे उसके घर छोड़ दिया गया।

इसके अलावा बच्ची के अभिभावकों ने बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई। लेकिन बच्ची का उपचार कराना बेहद जरूरी है, जो नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई पहलू हैं, जिससे लगता है कि उसे फंसाया जा रहा है।

ये लोग समर्थन में
प्रिंसिपल मनोज गौतम के पक्ष में उतरे सामाजिक संगठनों में शामिल निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू, प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र अरोड़ा, सिटीजन ग्रेवेंसिज कमेटी के अध्यक्ष एपीएस चोपड़ा, एमडीडी बाल भवन के अध्यक्ष पीआर नाथ, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष महेश कुमार, बाहृमण सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र बडौता, मानव सेवा संघ के सचिव डॉ. बीके कौशिक, अपना विचार मंच के अध्यक्ष पीडी कपूर, करनाल के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक भाटिया, शहर के सूर्य एन्कलेव के अध्यक्ष शमशेर सिंह संधू, फाइट फॉर जस्टिस के अध्यक्ष एडवोकेट हरीश आर्य, करनाल व्यापार मंडल के अध्यक्ष जेआर कालडा, सीबीएसई स्कूलों की एसोसिएशन सहोदय स्कूल कांपलेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा और जिले भर के करीब 50 अन्य स्कूलों के संचालक और प्रिंसिपल शामिल हैं।
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