केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) यूं तो लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए है। इसमें नए उद्यमों को लगाने के लिए 90 फीसदी तक ऋण दिया जाता है और 15 से 35 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। लेकिन अधिकांश लोग अधिक सब्सिडी पाने के उद्देश्य से आवेदन कर रहे हैं।
यही कारण है कि योजना के 50 प्रतिशत तक आवेदन निरस्त हो रहे हैं। यानी योजना में आधे आवेदकों की नजर सिर्फ सब्सिडी पर है। बैंक अधिकारियों ने आवेदन करने वालों से अनुरोध किया है कि योजना का उपयोग उद्यमों को बढ़ाकर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने में करें। योजना के जिलेभर में करीब पांच सौ से अधिक लोगों को लाभ दिया गया है, लेकिन 240 आवेदन अभी भी लंबित हैं। जिनकी जांच चल रही है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) जिला उद्योग केंद्रों के माध्यम से संचालित की जा रही हैं। खास बात यह है कि यह योजना निर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के लिए है। निर्माण यूनिट के लिए 25 लाख तक और सेवा सेक्टर के लिए 10 लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराया जाता है। यह ऐसी योजना है कि जिसमें कुल परियोजना लागत की 90 प्रतिशत धनराशि ऋण के रूप में मिल जाती है, सिर्फ 10 प्रतिशत का अंशदान उद्यमी को लगाना होता है। ऋण पर 11 से 12 प्रतिशत तक ब्याज देय है।
किसको कितनी सब्सिडी
सामान्य जाति के आवेदकों को शहरी क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। जबकि अनुसूजित जाति, जनजाति के लोगों को शहरी क्षेत्र में 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इसके लिए आयु सीमा कम से कम 18 साल रखी गई है। शैक्षिक योग्यता आठवीं पास है। जिसकी आय शून्य है, उसे भी इस योजना का लाभ दिया जा सकता है।
दस लाख रुपये तक कोई जमानत नहीं
मुख्य जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक सुरेंद्र सिंह सिंघाल ने बताया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए बिना किसी गारंटी, जमानत राशि के ही बैंक द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है।
वर्जन
योजना शून्य आय वालों के लिए 90 प्रतिशत ऋण पर आधारित होने, दस लाख तक कोई जमानत न होने आदि के कारण सर्वाधिक लाभप्रद है, लेकिन अधिकांश लोग इसकी सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आवेदन कर देते हैं। बैंक जब जांच करते हैं तो 50 प्रतिशत तक आवेदन फर्जी पाए जाते हैं, उन्हें रद्द किया जाता है। यही कारण है कि अब यह व्यवस्था की गई है कि तीन साल तक सब्सिडी बैंक में ही रहेगी, जब खाता नियमित तरीके से चलता रहेगा तो सब्सिडी को तीन साल बाद उद्यमी के खाते में भेज दी जाएगी।
सुरेंद्र सिंह सिंघाल, मुख्य जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक