अनाज मंडी करनाल में धान खरीद के दौरान बिना धान आए ही 294 गेटपास फर्जी तरीके से काट दिए जाने के मामले में पुलिस की जांच बेहद सुस्त है। छह नवंबर को रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद एक महीने से अधिक समय बीत गया है लेकिन पुलिस की जांच अभी प्रारंभिक दौर में ही है। कुल मिलाकर मामले में लीपापोती की तैयारी की जा रही है।
अनाज मंडी प्रशासन ने आढ़तियों से मिलकर 20 फर्मों के नाम पर 294 गेटपास जारी किए। तीन नवंबर को एसडीएम आयुष सिन्हा द्वारा की गई जांच में 319 गेटपास में से 294 फर्जी पाए गए थे। इन पर करीब 5.42 करोड़ रुपये का धान आढ़ती फर्मों के माध्यम से खरीदा जाना दर्शाया गया है। मामले में मार्केटिंग बोर्ड ने तो अधिकारियों व आढ़ती फर्मों पर कार्रवाई कर दी, लेकिन पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले को ठंडे बस्ते में डाले हुए है। आर्थिक अपराध शाखा प्रभारी संदीप कुमार कहते हैं कि जांच लगातार जारी है। इसमें किसानों की संख्या अधिक है, इसलिए जांच में समय लग रहा है। किसान इन दिनों खेती किसानी के कार्यों में व्यस्त हैं। फिर भी किसानों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है। शीघ्र ही मंडी अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी जाएगी। इधर, भले ही आर्थिक अपराध शाखा प्रभारी शीघ्र जांच पूरी करने का दावा कर रहे हैं लेकिन एक महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी जांच प्रारंभिक दौर में ही है, जिससे यह अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि पुलिस इस जांच को लेकर कितनी गंभीर है। मामला 5.42 करोड़ रुपये कीमत के धान से जुड़ा है। निष्पक्ष जांच होने पर ही पता लग सकेगा कि आखिर 5.42 करोड़ रुपये का धान खरीदा भी गया या नहीं ? यदि बिना धान आए ही इसकी खरीद दिखाई गई तो खरीद एजेंसियां भी इसकी जद में आ सकती हैं।