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लापरवाही पर कार्यदारी संस्था पर 8.45 करोड़ रुपये का जुर्माना

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बरसाती पानी के निकासी कार्य को पूरा नहीं करने पर 8.45 करोड़ का जुर्माना
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अमरुत योजना के तहत शहर में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को चल रहे 200 करोड़ के कार्य
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बारिश का मौसम तो बीत चुका है, लेकिन बरसाती पानी की निकासी के नाले यानी स्टोरम वाटर ड्रेन अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। इतना ही नहीं अमरुत योजना के तहत चल रहे सीवरेज, पेयजलापूर्ति, स्टोरम वाटर ड्रेन आदि के कार्य निर्धारित समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। धीमी गति से होने के कारण अब यह करीब 200 करोड़ रुपये की लागत वाले कार्य 2020 की बजाय 2021 में ही पूरे हो पाएंगे। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने इन कार्यों की समीक्षा की तो एजेंसियों के सुस्त रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और स्टोरम वाटर ड्रेन पर कार्य कर रही दिल्ली की कार्यदायी संस्था केकेएसआईएल-त्रिवेणी जेवी पर कुल लागत 84.50 करोड़ का 10 प्रतिशत यानी 8.45 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है। बैठक में विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधि, नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। अमरुत मिशन के सभी कार्यों को आगामी दो तीन माह में पूरा कराने को कहा गया है। इसमें बड़ौता और बजीदा ड्रेन के लेवल को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की गई।
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फरवरी-2020 तक कार्य पूरा करें वर्ना होगी सख्त कार्रवाई
-बारिश के जल की निकासी के कार्यों के लिए निर्माणाधीन 50 किलोमीटर लंबी बॉक्स टाइप ड्रेन में से अभी तक 36 किलोमीटर का कार्य ही पूरा हुआ है। इसमें चार रेन वाटर हार्वेस्टर भी बनाए जाने हैं, जिसमें झंझाड़ी व सैदपुरा में कार्य शुरू हो गया है, उचाना व धौलगढ़ में अभी काम शुरू भी नहीं हो सका है। इस कार्य में तीन इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन भी बनेंगे। इसमें जिनमें सैदपुरा व हैरीटेज लॉन के निकट काम शुरू कराया गया है, जबकि मीरा घाटी क्षेत्र में कार्य शुरू करने की तैयारी है। इन सभी कार्यों पर 84.50 करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, अब तक करीब 53 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। एजेंसी को यह कार्य 30 सितंबर तक पूरा करना था लेकिन उपायुक्त द्वारा लगातार हिदायतें देने के बावजूद कार्य में गति नहीं लाई गई।
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दिसंबर तक निगम से जुड़े 16 गांवों को मिल सकेगा शुद्ध पेयजल
-अमरुत योजना के तहत शहर में पेयजलापूर्ति को बेहतर करने के लिए 13.50 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों को पूरा हो जाने पर शहरी क्षेत्र के साथ साथ निगम से 16 गांवों के लोगों को पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जा सकेगा। इन गांवों तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए 49 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाली जा रही है। इसमें 45 किलोमीटर पाइप लाइन का कार्य पूरा कर लिया है। इसमें उचाना, दाहा जागीर, फूसगढ़ और जरीफा विरान गांव में पांच नलकूप भी लगाए जा रहे हैं। जिनसे पानी की आपूर्ति दी जा रही है। इससे अब तक 6340 पेयजल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
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गंदे नालों के पानी को शुद्ध करने को बन रहे पांच एसटीपी
-करोड़ो रुपये की लागत से शहर से निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध करने की कवायद के तहत शहर के आसपास पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जा रहे हैं। इनका कार्य भी काफी धीमी गति से चल रहा है। कई एसटीपी का तो भुगतान भी नगर निगम नहीं कर पा रहा है। बैठक में कार्यदायी संस्थाओं ने उपयाुक्त से भुगतान कराने की मांग भी रखी है। इसमें फूसगढ़ में 20 एमएलडी (मिलियन लीटर पर-डे) व शिव कॉलोनी में 8 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का तो कार्य करीब 70 प्रतिशत हो चुका है। वाटर लेबल कम होने पर उसका प्रेशर बढ़ाने के लिए सैदपुरा के 12 एमएलडी के इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस)व शुगर मिल क्षेत्र में 3.81 एमएलडी के आईपीएस का कार्य 62 प्रतिशत हो चुका है। प्रीतम पुरा में 1.18 एमएलडी वाले का कार्य अभी शुरू नहीं कराया जा सका है।
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