संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कफ सिरप की जांच को लेकर जिला औषधि नियंत्रण विभाग की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। जिले में करीब दो हजार मेडिकल स्टोर हैं, लेकिन बीते एक सप्ताह में महज 20 मेडिकल स्टोरों की ही जांच हो पाई है। वह भी केवल एक दिन में ही हुई है। वहीं, शुक्रवार को भी न तो किसी नई फैक्टरी की और न ही किसी मेडिकल स्टोर की जांच की गई। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कब तक सैंपल लिए जाएंगे और जांच रिपोर्ट सामने आएगी।
वहीं, पिछले शुक्रवार को जो जांच हुई, वह भी पहले से जांची गई फैक्टरी की हुई। एक सप्ताह में जो जांच हुई, वह अन्य जिलों के डीसीओ ने भी की है। हेडक्वार्टर की टीमों ने भी सीमित स्तर पर निरीक्षण किया। करनाल में अब तक आठ डीसीओ जांच करने के लिए आ चुके हैं, जिनमें से एक के अलावा बाकी सभी ने केवल एक-एक फैक्टरी की ही जांच की। जांच में भी केवल एक फैक्टरी को छोड़ बाकी सभी में स्टॉक शून्य रहा। केवल दस्तावेजों तक ही जांच सीमित हो सकी और नतीजतन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। प्रतिबंधित सिरपों की बिक्री रोकने के लिए सख्त निर्देश जरूर जारी किए गए हैं, मगर निगरानी और सैंपलिंग का अभाव कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है। जिले में फिलहाल सिर्फ एक ही औषधि नियंत्रण अधिकारी तैनात है जबकि दो पद स्वीकृत हैं। एक पद खाली होने से जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विभाग की टीम ने अब तक कुछ मेडिकल स्टोरों की जांच कर नमूने लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी लैब में लंबित है।
जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि जैसे ही फैक्टरी की जांच पूरी होगी, मेडिकल स्टोरों पर रैंडम सैंपलिंग की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिबंधित कफ सिरप की बिक्री कहां और किस स्तर पर हो रही है। हेडक्वार्टर से जो निर्देश मिल रहे हैं, उन्हीं के अनुसार जांच की जा रही है। सोमवार तक जिले में दूसरे औषधि अधिकारी की नियुक्ति हो सकती है। नए अधिकारी के आने से अभियान में तेजी आने की उम्मीद है।