करनाल। निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाकर संस्थान में ही बिक्री कराते न पकड़े जाएं, इसलिए स्कूल संचालकों ने नया रास्ता निकाला है। वे विद्यार्थियों और अभिभावकों को कक्षा में लगवाई जाने वाली किताबों की पर्ची दे रहे हैं। साथ ही मौखिक तौर पर बताया जा रहा है कि ये किताबें उन्हें कहां से मिलेंगी। इधर, बुक सेलर पर्ची लेते ही पहले से तैयार सेट अभिभावकों को थमा देता है और जो बिल दिया जा रहा है, उस पर न तो दुकान का नाम है और न ही स्कूल का।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को शहर में कई स्कूलों व बुक विक्रेताओं का दौरा किया तो उनका इस तरह से किताबें बेचने का खेल दिखाई दिया। हाईवे पार के स्कूलों ने तो स्कूल परिसर से कुछ दूरी पर ही किताबों की बिक्री का टैंट लगवाया है। जबकि शहर के निजी स्कूलों ने एक दुकान निर्धारित की है, जहां से सभी कक्षाओं की किताबें मिल रही हैं।
दयाल सिंह कॉलोनी की एक दुकान के पास केवल चार स्कूलों की किताबों की बिक्री हो रही है। यहां भी मुख्य काउंटर पर बैठा व्यक्ति ग्राहक से स्कूल का नाम पूछने के बाद या तो अंदर काउंटर पर भेजता है या फिर पीछे के गोदाम में। जहां से तैयार सेट उपभोक्ताओं को दिया रहा है। अभिभावकों से मिले बिल के अनुसार, मिलीभगत के बाद सबसे सस्ता नर्सरी का सेट 1300 रुपये का और पांचवीं का सेट 4620 रुपये में छूट देने के बाद दिया जा रहा है। 10 से 14 किताबों के इन सेट में एक भी किताब एनसीईआरटी की नहीं है। वहीं नोट बुक का सेट अलग से इन्हीं दुकानों पर बेचा जा रहा है। ब्यूरो
नया शिक्षा सत्र शुरू हुए अभी चार दिन ही हुए हैं। इधर स्कूलों की ओर से विद्यार्थियों को इसी सप्ताह में हर हाल में किताबें लेने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। बाकायदा अभिभावकों को व्हाट्सएप के माध्यम से सूचित भी किया जा रहा है। इसके पीछे दावा यह किया जा रहा है कि सोमवार से उन्हें पढ़ाई रेगुलर करनी है पर बुक विक्रेताओं की ओर से स्कूलों संचालकों से शीघ्र स्टॉक निकलवाने का आग्रह किया गया है। ऐसे में जो विद्यार्थी तय समय तक किताबें नहीं लेंगे, उन्हें कक्षाओं में न बैठाने का भी डर दिया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारी रैंडम जांच करें
अभिभावक एकता संघ के प्रधान दिनेश नरुला और एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को नोटिस देकर किताबों की जानकारी मांगी गई है। ऐसे स्कूल अपनी चोरी नहीं बताएंगे। अच्छा यह होगा कि शिक्षा अधिकारी रैंडम विद्यार्थियों के बैग और स्कूलों की जांच करें तो पता चल जाएगा किसने कितनी निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाई हैं। प्रकाशकों और स्कूलों में मोटा कमीशन तय है, आधे से ज्यादा किताबें बिक भी चुकी हैं।
इस कक्षा की किताबों के सेट का यह है रेट
कक्षा
रेट
नर्सरी
1300
एलकेजी
2000
यूकेजी
2600
पहली
4350
दूसरी
4500
तीसरी
3753
चौथी
3850
पांचवीं
4620
वर्जन
नोटिस देकर स्कूलों से जानकारी मांगी है। यदि किसी कक्षा में सभी किताबें निजी प्रकाशकों की लगी हैं तो अभिभावक व्यक्तिगत रूप से हमें शिकायत दें, हम कार्रवाई करेंगे। केवल एनसीईआरटी या संबंधित बोर्ड द्वारा निर्धारित किताबें ही विद्यार्थियों को लगवाई जा सकती हैं। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी