राज्यसभा सांसद चौ. बीरेंद्र सिंह ने शहर की कंबोज धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। अपने संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कुछ गलत लोगों के कारण हरियाणा में तीसरी बार सत्ता आने से फिसल सकती है।
भाजपा का हरियाणा के संदर्भ में कोई खास जनाधार नहीं है। थोड़ा बहुत शहरों में भाजपा का जनाधार है। भाजपा ऐसी राजनीतिक शक्ति नहीं, जिससे कांग्रेस को खतरा हो। रविवार को कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने के बाद उन्होंने पत्रकाराें से बात की। इससे पूर्व उन्होंने जींद रैली को सफल बनाने पर कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट किया।
उन्होंने कहा कि कभी मौका मिला तो वे दिल से सेवा करेंगे। यह उनका अरमान है। राजनीतिक तौर पर वर्तमान में कें द्र और हरियाणा में कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं है, जिससे वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सके। उनके दिल में पार्टी और लोगों के लिए समर्पण भाव है।
काम करने के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने का सपना चौ. भजनलाल की सत्ता में उनकी गैरहाजिरी में सीएम की कुर्सी पर बैठकर देखा था। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे समझ गए थे कि मुख्यमंत्री बने बिना लोगों की सेवा करना और प्रदेश का संपूर्ण विकास करना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा जींद रैली में सोनिया गांधी को आने से स्वयं उन्होंने मात्र इसलिए रोका था कि उनके समर्थक विरोधी कांग्रेसियों को मंच पर नहीं देख सकते थे। ऐसे लोग सोनिया गांधी के साथ रैली में अवश्य आते। उनकी मजबूरी भी थी। उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनना चाहिए।
वे फूलचंद मुलाना के विरोधी नहीं है लेकिन उन्होंने बहुत लंबा समय निकाल दिया है। नया अध्यक्ष बनने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा। राहुल गांधी वर्तमान राजनीति को बदलने के प्रयास में है। राहुल गांधी के अनुसार राजनीति आम आदमी के पक्ष में होनी चाहिए।
बडे़ लोगों के लिए नहीं। वे स्वयं उनके अभियान में शामिल हैं। उन्होंने उत्तरी हरियाणा में विकास के मामलों में हुए भेदभाव का मुद्दा गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि करनाल और अंबाला जिले को राजनीतिक लोगों ने सरकारी मान रखा है। इस प्रथा को तोड़ना जरूरी है। इन जिलों की लड़ाई लोग लड़ते है, कोई नेता नहीं। मौके पर चौ. रामकिशन, रामधन कंबोज, शमशेर गोगी, जोगेंद्र वाल्मीकि, रामकुमार, सुरेश गुप्ता समेत कई गांवों के पूर्व सरपंच व अन्य मौजूद थे।