- नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 10 प्रतिशत रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अंधड़ और धूल भरी हवाओं और खासकर फसल कटाई के इस मौसम में खेतों से उठती धूल सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव दमा, सांस, त्वचा और आंखों से संबंधित रोगियों पर देखने को मिल रहा है। जिला नागरिक अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर का कहना है कि खेतों में फसल कटाई जोरों पर है। ट्रैक्टर और थ्रेशर से कटाई करते समय उड़ती धूल, तेज हवाओं के साथ मिलकर वातावरण को धुंधला बना रही है।
यह धूल हवा में लंबे समय तक तैरती रहती है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां और एलर्जी की शिकायतें बढ़ रही हैं। कुछ दिनों में सांस, दमा जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की बढ़ोतरी हुई है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. कुलबीर ने कहा कि इन दिनों अस्पताल में दमा, खांसी, सांस फूलने जैसी समस्या लेकर रोजाना 400 मरीजों की ओपीडी में से 10 प्रतिशत मिल रहे हैं।
भूसे के छोटे कण से स्वास वाहिनियां ब्लॉक
डॉ. कुलबीर ने बताया कि कई मरीजों में मिट्टी व भूसे के समान छोटे कण फेफड़ों की गहराई तक घुसकर एलर्जी का काम करते हैं जिससे फेफड़ों में ज्यादा बलगम पैदा हो जाता है और स्वास वाहिनियां ब्लॉक हो जाती हैं और सांस रोगियों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ये बारीक बुरादा इस आंधी भरे मौसम में मिल जाता है जिससे इसके कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं और सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और बारिश न आने तक मौजूद रहते हैं। जिससे फेफड़ों में सूजन पैदा हो जाती है।
आंखों में इंफैक्शन संभव
हवा में मौजूद धूल और कण आंखों की सतह (कॉर्निया) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे जलन, लाली, खुजली, पानी आना और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में कंजक्टिवाइटिस या इंफेक्शन भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि मास्क व चश्मे का उपयोग करें और आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान दें। अगर किसी भी तरह की असहजता लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. आशुतोष मित्तल, नेत्र रोग चिकित्सक
बचाव के उपाय
सांस रोगी, टीबी, दमा मरीजों को इस मौसम में जब तक वर्षा या मौसम में बदलाव न हो तब तक मुंह पर कपड़ा या मास्क लगाना चाहिए। पानी का अधिक सेवन करना चाहिए। सुबह शाम साफ पानी की भांप लेनी चाहिए। वहीं, जिन लोगों का पहले से इलाज चल रहा है उन्हें जारी रखना चाहिए।
- डॉ. कुलबीर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी