एनडीआरआई ने हेड गाइडिड क्लोनिंग तकनीक से रजत नामक क्लोन कटड़े को जन्म
देकर उपलब्धि हासिल की है। यह सामान्य प्रसव से पैदा हुआ है। इसका वजन 32
किलोग्राम है।
नवजात कटड़ा मुर्राह नस्ल के झोटे एमयू 4393 का क्लोन है। वैज्ञानिक
डॉ. एमएस चौहान ने बताया कि क्लोन बनाने के दो तरीके हैं, एक नर पशुओं
द्वारा संतति परीक्षित सांड़ों के क्लोन उत्पन्न करके और मादा पशुओं द्वारा
उच्च उत्पादन वाली मादा पशुओं से क्लोन उत्पन्न करके। इस केस में दाता
कोशिका को पन्नति परीक्षित सांड़ के प्रशीतित द्रवित वीर्य को 1995 में
विभाजित किया गया। इस सांड़ की श्रेष्ठता 22.29 प्रतिशत थी।
वैज्ञानिकों की मेहनत ला रही रंग
एनडीआरआई
के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि एनडीआरआई के वैज्ञानिक निरंतर
क्लोन तैयार करने में लगे हैं। रजत कटडे़ का जन्म 23 जुलाई को हुआ है।
वैज्ञानिकों की मेहनत रंग ला रही है। इससे करनाल एनडीआरआई विश्व में
प्रसिद्ध है।
मेल में तीन और फीमेल में चार क्लोन तैयार
अब तक
सात क्लोन तैयार किए जा चुके हैं। मेल में श्रेष्ठ, स्वर्ण व रजत को बनाया
है। फीमेल में गरिमा, गरिमा-2, पूर्णिमा व लालीमा को क्लोन से पैदा किया
है। डॉ. एके श्रीवास्तव बताते हैं कि श्रेष्ठ सांड़ों की काफी कमी है और
हेड गाइडिड क्लोनिंग तकनीक से इस कमी को पूरा करने का लगातार प्रयास किए जा
रहा है। यह डॉ. एसके चौहान, डॉ. एमएस चौहान, डॉ. आरएस मानिक, डॉ. पी पलटा,
डॉ. शिवप्रसाद के सराहनीय प्रयास से संभव हुआ है।