तरावड़ी कथा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। स्वयं
तरावड़ी। अनाज मंडी में जियो गीता परिवार की ओर से आयोजित तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जीवन का मार्गदर्शक है। गीता हमें सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, मनुष्य को अपने कर्म पथ से विचलित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया, वही आज भी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की समस्याओं का समाधान है।स्वामी जी ने कर्मयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना फल की इच्छा के किया गया कर्म ही सच्चा कर्मयोग है। जब मनुष्य अपने कर्तव्य को ईश्वरार्पण भाव से करता है, तो उसके जीवन में शांति, संतुलन और सफलता स्वतः प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि आज के युग में तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिकता के बीच गीता का संदेश मनुष्य को आत्मबल प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि गीता हमें धर्म, सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
यदि प्रत्येक व्यक्ति गीता के एक-एक श्लोक को अपने जीवन में उतार ले, तो समाज में व्याप्त अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं। गीता का ज्ञान व्यक्ति को केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी सशक्त बनाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का प्रकाश विश्वभर में फैल रहा है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों और गीता के ज्ञान को भी अपनाएं। इस अवसर पर श्री सनातन धर्म सभा की ओर से स्वामी ज्ञानानंद महाराज का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक भगवान दास कबीर पंथी, विधायक जगमोहन आनंद, अग्रवाल सभा के प्रधान एवं आयोजक प्रवीण गर्ग, रमेश गुप्ता और वीरेंद्र बंसल के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।