- अन्नपूर्णा आश्रम में आयोजित हुआ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। अन्नपूर्णा आश्रम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की प्रथम वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम का समापन हो गया। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में गणेश पूजन, महाआरती, कथा, हवन-यज्ञ व अमृतमयी भंडारे का आयोजन हुआ। देवी सुदीक्षा सरस्वती रामायणी ने कहा कि राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर भक्त और भगवान के बीच प्रेम की पराकाष्ठा को जाहिर किया। ऊंच-नीच की भावना को मिटाया। शबरी ने मर्यादा का पालन कर संत मिलन का इंतजार किया और भगवान पर भरोसा रखा। राम ने चरणों में स्थान दिया।
प्रात:कालीन वाद्य यंत्रों के साथ यजमान परिवार ने हवन में आहुतियां डालीं। देवी सुदीक्षा सरस्वती रामायणी ने कहा कि राम, लक्ष्मण और सीता वन चले गए और वे चित्रकूट में निवास करने लगे। उधर सूना रथ लेकर जैसे ही सुमंत अयोध्या में लौटे तो पूरी अयोध्या में शोक छा गया। राजा दशरथ विलाप करने लगे और राम को पुकारते-पुकारते मूर्छित होकर धरती पर गिर गए। जैसे ही उन्हें होश आया उन्हें अपने सामने एक वृद्ध दंपती लाठी लिए खड़ी दिखाई दी, जो श्रवण कुमार के माता-पिता थे। दशरथ को श्रवण कुमार के वध की पूरी घटना याद आई और उन्होंने कौशल्या को सारी घटना सुनाई।
मरते समय मनुष्य की स्मृति में उसके जीवन काल में किए हुए सारे पाप सामने आ जाते हैं। महाराजा दशरथ ने अनजाने में श्रवण कुमार का वध किया था जब अनजाने में किए गए पाप का फल इतना दुखदाई होता है कि दशरथ जैसे धर्म धुरंधर गुणनिधि ज्ञानी को इतना तड़पाता है तो जानबूझकर पाप करने वालों की अंत समय में क्या दशा होती होगी।
कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष मा. अमन शर्मा एवं उपाध्यक्ष विपिन छाबड़ा ने कार्यक्रम में तीन दिनों तक सेवा करने वाले सभी दानी सज्जनों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर लाला साधूराम सिंगला, वेद सलूजा, गणेश खन्ना, मा. बालकिशन त्रिपाठी, संजय गाबा के अलावा समिति के सभी सदस्य मुख्य रूप से मौजूद थे।