शहर की सड़कों पर जल रही पुरानी स्ट्रीट लाइटों की जगह पर अब नई एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। नगर निगम शहर में लगी करीब 9500 स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइट लगाएगा। इससे बिजली की बचत होने के साथ ही लो वोल्टेज पर भी सड़कों पर रोशनी कम नहीं होगी। निगम नए वर्ष से इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के प्रयास में जुटा है। इससे निगम को प्रति वर्ष लाखों रुपये के राजस्व का लाभ भी मिलेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए निगम जल्द ही ईईएसएल (एनर्जी एफीसिएंसी सर्विस लिमिटेड) से अनुबंध करेगा। शहर में इस समय अधिकतर स्ट्रीट लाइटों में सीएफएल या 250 वाट टंगस्टन तंतु के बल्ब लगे हैं। जो बहुत ज्यादा बिजली खर्च करने के साथ ही उष्मा भी अधिक उत्सर्जन करते हैं। इससे निगम का प्रति वर्ष तीन करोड़ रुपये सालाना बिजली बिल चुकाना पड़ता है। एलईडी लाइट लगने के बाद काफी हद तक बिजली की बचत होगी तथा निगम के राजस्व में लाभ होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि एलइडी की शुरुआत होते के बाद कम से कम 40 प्रतिशत तक बिजली की बचत होगी, साथ ही निगम का दूसरा खर्च भी बचेगा।
हालांकि स्मार्ट सिटी की दौड़ में आगे चल रही कर्ण नगरी को फिलहाल तो 26 जनवरी को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित होने वाले 20 शहर के नाम की घोषणा होने का इंतजार है। निगम प्रशासन सहित शहर की जनता को भी शहर के स्मार्ट सिटी के लिए चयनित होने का पूरा विश्वास है। इससे कई प्रपोजल स्मार्ट सिटी की फैसले के बाद ही शुरू होंगे। फिर भी नगर निगम बिजली बचत को प्राथमिक एजेंडे में रखते हुए इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।
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होगी 40 प्रतिशत बिजली की बचत
शहर में एलईडी लाइटों के लगने से करीब 40 प्रतिशत बिजली की बचत होगी। वहीं कम वोल्टेज पर भी एलईडी लाइटों की रोशनी कम नहीं होगी। दिन ढलते ही पूरा शहर दुधिया रोशनी से जगमगाने लगेंगी। इससे रात के समय वाहन चालकों को कोई परेशानी नहीं होगी। निगम ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
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शहर में इस समय 9500 स्ट्रीट लाइट प्वाइंट
नगर निगम क्षेत्र में आने वाली कॉलोनियों और सड़कों पर इस समय 60 मीटरों से करीब 9500 स्ट्रीट लाइटें जल रही है। जो हर माह हजारों यूनिट बिजली खर्च करती हैं, इसकी एवज में नगर निगम को प्रतिवर्ष तीन करोड़ रुपये बिजली बिलों का भुगतान करना पड़ता है। शहर में इस समय ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों में सीएफएल या 250 वॉट तक के बल्ब लगे हुए हैं। जो बिजली की बरबादी का कारण बन रहे हैं। लेकिन अब एलईडी लाइट लगने के बाद काफी हद तक बिजली की बचत होगी। इससे निगम को प्रति वर्ष लाखों रुपये का राजस्व लाभ होगा। एक्सपर्ट बताते हैं कि एक दस वाट की सीएफएसएल के बराबर दो वाट की एलईडी रोशनी देती है।
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उपभोक्ताओं के बिलों से जमा होता हो स्ट्रीट लाइटों का बिल
बिजली निगम द्वारा शहरी उपभोक्ताओं के बिलों से प्रति यूनिट पांच पैसे म्युनिसिपल टैक्स के रुप में काटे जाते हैं। बिजली निगम के पास जितनी भी राशि जमा होती है, उसे नगर निगम के बिजली बिलों में जोड़ा जाता है। यदि शहर में एलईडी लाइटें लगी तो इसे शहर की जनता के रुपयों की भी बचत होगी।
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निगम के पास हैं दो आप्शन : कटारिया
निगम आयुक्त सुमेधा कटारिया का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही ईईएसएल से हमारा एमओयू साइन होना है। अभी हमारे पास दो आप्शन हैं, एक एकमुश्त पैसा ईईएसएल को दे दें और देखभाल निगम करे। दूसरा विकल्प यह है कि सात साल तक ईईएसएल लाइटों की देखभाल करे और प्रति वर्ष जो कुल बिल वसूला जाएगा, उसका 50 प्रतिशत उनको दिया जाए। दोनों विकल्पों पर बातचीत चल रही है। शहर और निगम के हित में सभी की सहमति से फैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि नए साल में इस प्रोजेक्ट को शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल करार होने के पार प्रोजेक्ट डिटेल रिपोर्ट बनेगी, उसमें ही पूरे प्रोजेक्ट की लागत पता चलेगी।
वर्जन
शहर में एलईडी लाइटों का मुद्दा हाउस की बैठक में भी उठा था। जिसे सभी पार्षदों ने अपनी सहमति दी है। निगम अधिकारियों को भी इस प्रपोजल पर काम करने के निर्देश दिए हैं। नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही निगम इस योजना पर काम शुरू करेगा।
रेनूबाला गुप्ता, मेयर नगर निगम करनाल।