पुराने वोटों से केवल बीज मिल रहा है, खाद नहीं
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नोटबंदी की समस्या किसानों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। सरकार की घोषणा के बाद सरकारी बीज एवं खाद केंद्रों पर पुराने नोट न लिए जाने से किसानों को खाद की खरीद में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों का कहना है कि फसल की बुआई का काम लगभग पूरा हो चुका है, अब खेतों में खाद की जरूरत है। यदि कोई किसान खाद खरीदने के लिए सरकारी केंद्र पर पहुंचता है तो पुराने नोटों की समस्या उनके आड़े आ जाती है, और दिक्कत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। सरकार ने 22 नवंबर को घोषणा की है कि सरकारी बीज एवं खाद केंद्रों पर बीज की खरीद में पुराने 500 व 1000 रुपये के नोट का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन खाद की खरीद के लिए पुराने नोट नहीं लिए जाएंगे। यदि कोई किसान खाद खरीदना चाहता है तो वह चेक या छोटे नोटों का इस्तेमाल कर सकता है।
सरकार के इस फैसले के बाद किसानों की सांसे फूल चुकी है। किसानों को इस समय बीज की नही, बल्कि खाद की बहुत ही ज्यादा जरूरत है, लेकिन खाद पर पुराने नोट बंद होने से किसानों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सरकार के इस फैसले से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। किसान रणधीर हसरपुर, मिनिस्टर बल्हेडा, दुलीचंद हसनपुर, कपिल कुमार, कृष्ण बसताड़ा, शुभम आदि का कहना है कि खेतों में फसल की बुआई हो चुकी है और सरकार ने बीज की खरीद पर पुराने नोटों की छूट दी है, लेकिन खाद की खरीद पर पुराने नोटों को लेना बंद कर दिया है।