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Karnal News: एक्सपायर सिलिंडरों के भरोसे सुरक्षा

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जितेंद्र नरवाल
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करनाल। अगर आप लघु सचिवालय जा रहे हैं तो सतर्क हो जाएं। यहां पर लगे सीओटू (कार्बन डाइऑक्साइड) से भरे फायर सिलिंडर एक्सपायर हो चुके हैं। यहां तक कि कमरों के फर्श पर पानी और बिजली की खुली तारें हैं। बिजली का काम भी चल रहा है।
फायर हाईड्रेंट सिस्टम के टूटे शीशों में खस्ताहाल होज पाइप तक धूल से अटे हैं। हालांकि लघु सचिवालय की दीवारों पर चेतावनी भरे पोस्टर तो लगे हैं, इनमें स्पष्ट निर्देश हैं कि यहां खतरा है।
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खास बात ये है कि लघु सचिवालय की इमारत के पास दमकल विभाग की एनओसी तक नहीं है। जो सचिवालय की इमारत को ये साबित करे कि ये अग्निकांड जैसी आपदा में सुरक्षित है। बावजूद अधिकारी इनकी सुध नहीं ले पाए हैं। अगर यहां कोई बिजली से करंट लगने या अग्निकांड होता है तो उसे काबू करना काफी मुश्किल होगा।
गौरतलब है कि लघु सचिवालय में रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं। यहां पर तकरीबन सभी प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय भी हैं। डीसी से लेकर एसपी, एडीसी, एसडीएम, सीटीएम तक यहीं बैठते हैं। बावजूद सुरक्षा कारणों का यहां पर ख्याल नहीं रखा जा रहा है।
सुरक्षा के नजरिए से यहां सीसीटीवी तो लगाए गए हैं लेकिन सुरक्षा की आधार व्यवस्थाओं को ही नजर अंदाज किया जा रहा है। वहीं, सचिवालय में तीन लिफ्ट हैं, दो पर काम चल रहा है।
चालू लिफ्ट सिर्फ अधिकारियों और वीआईपी के लिए है। बंद दोनों लिफ्ट के ऊपर भी चेतावनी पोस्टर लगाए गए हैं। वहीं, साथ में चेतावनी बोर्ड भी लगे हैं। जिनमें लिखा है कि भूंकप और आग के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और केवल सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
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दो गैस हर प्रकार के आग पर पाती है काबू : फायर सिलिंडरों में दो प्रकार की गैस होती है।
एक सीओटू यानी कार्बन डाइऑक्साइड और दूसरी एबीसी गैस होती है। बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग पर काबू पाने में सीओटू काफी असरदार है जबकि फर्नीचर और कपड़े में लगी आग को बुझाने में एबीसी गैस काम आती है। अधिकारियों के अनुसार फायर सिलिंडरों को हर साल भरवाना जरूरी होता है। इनके इस्तेमाल की अवधि एक साल तक ही होती है। इसके लिए हर फायर सिलिंडर पर गैस भरने और इसकी एक्सपायरी तिथि तक लिखी होती है।

25सीटीके06..महाकुंभ के लिए सामना को खाना करते संत व भाजपा कार्यकर्ता। संवाद- फोटो : jammu

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