माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कोहरा छाने के बाद प्रशासन की ओर से सड़कों पर सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। यदि यह कार्य दो माह पूर्व हो जाए, तो इन खामियों के कारण होने वाले हादसों पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। यह कहना है सड़क सुरक्षा से जुड़े बुद्धिजीवी लोगों का। इन्होंने सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में अपनी बात रखी और प्रशासन से भी धुंध से पहले जरूरी इंतजाम होने की मांग की।
सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने एलान किया कि यदि प्रशासन एक सप्ताह में सड़कों पर सफेद पट्टी लगवा दे और जेबरा क्रॉसिंग चौराहों पर बनवा दे तो वे आम जन को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे। इस दौरान चौराहों पर लोगों को जेबरा क्रॉसिंग से पहले वाहन रोकने, बत्ती न तोड़ने आदि यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। विदित हो कि धुंध छाने के बाद अमर उजाला ने अभियान चलाकर सड़कों की खामियों को उजागर किया। 17 से 25 नवंबर तक रोजाना इस मुद्दे पर समाचार प्रकाशित किया गया। जिसमें सफेद पट्टी न होने से होने वाले हादसे, सड़क की अन्य खामियां व कोहरे में किन वजहों से लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, इसे उजागर किया गया। इसी के तहत संवाद कार्यक्रम हुआ।
सफेद पट्टी रात में लाइफलाइन
सफेद पट्टी के साथ-साथ शहर की उखड़ी सड़कों की मरम्मत भी जरूरी है। मुख्य मार्गों पर कोहरे और रात में में सफेद पट्टी लाइफ लाइन है। लेकिन शहर की कई सड़कों पर गहरे गड्ढे भी ऐसे समय में हादसे का कारण बनते हैं। - केएल विरमानी, वाइस चेयरमैन सीजीसी
चौराहों पर सुरक्षा इंतजाम जरूरी
शहर में ऐसे कई चौराहे हैं, जहां पर जाम की स्थिति ज्यादा रहती है। ऐसी जगहों पर स्लीप लेन निकलनी चाहिए। कोहरे के समय में यहां पर भी हादसे होते हैं। यदि स्लीप लेन होगी तो सुगम सफर मिलेगा। इस तरफ भी ध्यान दिया जाना चाहिए। - परनीता कपूर, समाजसेवी
शहर में भारी वाहनों पर लगे रोक
शहर के बीच से भारी वाहन गुजरते हैं। हांसी चौक क्षेत्र, माल रोड, काछवा रोड, कैथल रोड आदि पर भारी वाहनों के कारण हादसे होते हैं। रात के समय व कोहरे में इनके कारण भी हादसा होता है। शहर के बीच से गुजरने से इनके कारण सड़कें भी उखड़ती हैं। - रमेश कपूर, सलाहकार
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर जरूरी
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर टेप लगनी चाहिए। इनके पीछे पीला या सफेद पेंट होना चाहिए। ताकि रात में व कोहरे में यह स्पष्ट दिखाई पड़ें। प्रशासन की ओर से भी समय से पूर्व यह कार्य करना चाहिए। ओवर हाईट वाले वाहनों से भी हादसे होते हैं। - रमन मिड्डा, सदस्य, आरएसओ
नोडल अधिकारी बनें तो दुरुस्त रहें सड़कें
सड़कों के हालात खराब हैं। प्रशासन हादसा होने के बाद जागता है। या फिर जब अखबारों में खामियां उजागर की जाती हैं, तब काम होता है। विभागों की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त करके सड़कों की नियमित तौर पर निगरानी की जाए तो खामियां नहीं रहेंगी। - तेजपाल, सड़क सुरक्षा समिति सदस्य
अधर में लटकी सड़कों की कराई जाए मरम्मत
कई सड़कों की मरम्मत व नवनिर्माण का कार्य अधर में है। प्रशासन को सड़कों संबंधित सभी कार्य अक्तूबर माह के अंत तक पूरे कर लेने चाहिए। ताकि कोहरे में ये खामियां किसी की जान न लें। अधर में लटके निर्माण से भी कई हादसे होते हैं। - राजीव वधवा, हांसी चौक
नशे में वाहन चलाने वालों पर कसे शिकंजा
पुलिसकर्मी ड्यूटी सही से करें और रात में यदि नशे में वाहन चलाने वालों पर नियमित तौर पर शिकंजा कसा जाए। तो हादसों की संख्या घटेगी। इन दिनों कोहरा भी छाता है और नशे में लोग वाहन भी चलाते हैं। इससे कहीं न कहीं सड़क हादसा होता है। - रजनीश चौपड़ा, निवासी रामनगर
चौराहों पर चलाएंगे जागरूकता अभियान
प्रशासन जैबरा क्रॉसिंग बनाए और सफेद पट्टी लगाए, इसके बाद हम चौराहों पर खड़े होकर लोगों को जागरूक करेंगे। बकायदा बताया जाएगा कि चौराहें पर बत्ती होने पर कैसे वाहन रोकना चाहिए। जैबरा क्रॉसिंग पर कई लोग वाहन खड़ा कर लेते हैं। - संदीप लाठर, सदस्य, आरएसओ
पहले सावधान हों तो घटे सड़क हादसे
सड़कों की खामियों को अक्तूबर माह के अंत तक दुरुस्त कर लिया जाना चाहिए। नवंबर माह में कोहरा छाने लगता है। वहीं सर्दी में सड़क निर्माण कार्य भी नहीं हो पाता, इसलिए लोग हादसों का शिकार होते हैं। इस दिशा में काम की जरूरत है। - अंजू शर्मा, चेयरपर्सन, सीजीसी
सड़क किनारे खड़े वाहनों पर हो कार्रवाई
सड़क किनारे खड़े होने वाले वाहन भी हादसों की वजह हैं। पुलिस को सख्ती बरतनी होगी। कोहरे के दिनों में ऐसे वाहनों से हादसे की संभावना ज्यादा रहती है। सड़क किनारे की जगह ढाबा या पेट्रोल पंप की पार्किंग में ही वाहन खड़ा होना चाहिए। - अशोक भारद्वाज, पूर्व एसआई ट्रैफिक