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वैज्ञानिकों ने किया खेतों का निरीक्षण

Tue, 28 Jan 2014 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इंद्री
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गेहूं में पीला रतुआ की बीमारी की रोकथाम के लिए आईसीएआर दिल्ली के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और इंद्री के कृषि विभाग के अधिकारियों ने गांव ब्याना में किसान लछमन माटा व सूरज छाबड़ा के खेत का निरीक्षण किया।
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उन्होंने किसानों को बचाव के उपाय बताए। दल में वरिष्ठ वैज्ञानिक सोमेश्वर भगत, डॉ. अश्विनी कुमार और डॉ. रतन सिंह शामिल थे।

आईसीएआर दिल्ली से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक सोमेश्वर भगत ने कहा कि गांव ब्याना के किसान के खेत गेहूं की फसल में पीले रतुआ बीमारी फैलने की जांच के लिए गांव में आए हैं ताकि इस बीमारी को रोका जा सके।

यह बीमारी अधिकतर ठंड और नमी के मौसम में फैलती है। बीमारी के लक्षण पौधो की पत्तियों पर पीले रंग की धारियों में पीले पाउडर के रूप में दिखाई देते हैं। इससे किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही अपने कृषि विभाग के एडीओ से संपर्क करें।
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इसकी रोकथाम के लिए फसल पर प्रोपिकोना जोल 25 ईसी नामक दवाई एक एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे किया जाना चाहिए। समय से बीमारी की रोकथाम न करने पर फसल में 60 से 80 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

कृषि विभाग के डॉ. अश्विनी ने बताया कि गेहूं में पीला रतुआ फैलने की आशंका में किसानों को कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने किसानों से इस बीमारी को लेकर पूरी सावधानी बरतने के सुझाव दिए।

उन्होंने किसान को अपनी फसलों में आई बीमारी की रोकथाम में स्वयं डाक्टर बनने की बजाए कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेकर दवाइयों का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
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