सवा माह की छुट्टियों के बाद शुक्रवार को शिक्षा के मंदिर (स्कूल) खुल गए। विद्यार्थी भी पूरे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे लेकिन विद्यार्थियों को पहले ही दिन अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। विद्यार्थियों को फिर से बिजली, पानी, अध्यापकों की कमी और सफाई व्यवस्था जैसी पुरानी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई स्कूलों में विद्यार्थियों को अध्यापकों की कमी के चलते पूरा दिन छुट्टी के इंतजार में व्यतीत कर मायूस होकर लौटना पड़ा। जिले के ज्यादातर स्कूलों में बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी नजर आयी। इससे विद्यार्थियों को पूरा दिन गर्मी के चलते पसीने से तर होना पड़ा। हालांकि पहले दिन स्कूल पहुंचने वालों की संख्या 30 फीसदी से भी कम रही, लेकिन प्रशासन की अनदेखी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को स्कूलों का दौरा कर व्यवस्था का जायजा लिया, लेकिन किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों के लिए सभी सुविधाएं देखने को नहीं मिली। टीम सबसे पहले सेक्टर-13 स्थित कन्या महाविद्यालय पहुंची। जहां भीषण गर्मी में पढ़ रही छात्राएं पसीने से भीगी नजर आई। अध्यापक व छात्राओं का ध्यान किताबों की बजाए गर्मी से बचने के लिए गत्तों से हवा झोलने पर था। अध्यापक भी बच्चों को पढ़ाने की बजाए इनवर्टर वाले कमरे में पंखों की हवा लेते नजर आए।
जब अमर उजाला टीम ने प्रिंसिपल सुमन ढींगड़ा से स्कूल में जनरेटर होने के बाद भी जनरेटर न चलाने का कारण पूछा तो प्रिंसिपल ने बताया कि जनरेटर का कनेक्शन सिर्फ कंप्यूटर लैब से जुड़ा है। इस जनरेटर से पंखे नहीं चलते। जबकि स्कूल में रखे जनरेटर की क्षमता दो स्कूलों का लोड एक साथ चलाने की है, लेकिन इसके बाद भी कक्षाओं के पंखों को नहीं जोड़ा गया है। इसके बाद टीम ने रेलवे रोड स्थित कन्या महाविद्यालय का दौरा किया, तो वहां पर भी यही समस्याएं देखने को मिली। इसके अलावा शहर के अन्य चार स्कूल, ब्यॉय स्कूल, प्रेमनगर हाई स्कूल, मॉडल टाउन हाई स्कूल व प्राइमरी स्कूल का दौरा किया गया। हर स्कूल में स्थिति एक जैसी दिखाई दी। स्कूलों में सुविधाओं का अभाव व प्रशासन की लापरवाही से हजारों बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
नियमित भर्ती हुई नहीं, 250 गेस्ट टीचर भी हटाए
शिक्षा विभाग की ओर से जिले के विभिन्न स्कूलों से 250 अतिथि अध्यापकों को सरप्लस बताकर हटाया है। सरकार अभी तक खाली पदों पर नियमित भर्ती भी नहीं कर पाई है। इससे जिले के अधिकतर स्कूलों में अध्यापकों कमी हो गई है। ऐसे अब एक बार फिर से अव्यवस्थाओं के बीच स्कूलों में कक्षाएं लगेंगी। जिले में करीब 55 स्कूल तो ऐसे भी हैं, जहां गणित, साइंस व अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के अध्यापक नहीं है। अतिथि अध्यापकों को हटाए जाने के बाद स्कूलों में अध्यापकों का टोटा बढ़ गया है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षा प्रभावित हो रही है।
जिले के 167 स्कूलों का डिजिटल एजुकेशन प्लान ध्वस्त
स्कूली शिक्षा के साथ विद्यार्थी को कंप्यूटर ज्ञान देने के लिए उद्देश्य से सरकार की ओर से प्रदेशभर के हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर लैब की व्यवस्था की है। जिले में भी 167 स्कूलों कंप्यूटर लैब बनाई गई है। विभाग द्वारा कंप्यूटर लैब के संचालन के लिए 157 कंप्यूटर अध्यापकों व 142 लैब सहायकों को अनुबंध आधार पर लगाया था, लेकिन 31 मई को उनका अनुबंध समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार द्वारा अभी तक उनकी नियुक्ति को लेकर कोई भी निर्देश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में बिना कंप्यूटर अध्यापकों व लैब सहायकों के विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा नहीं मिलेगी। सरकार की अनदेखी से करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई कंप्यूटर लैब का भी कोई फायदा नहीं हो रहा है। विभाग द्वारा अभी तक कंप्यूटर अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर कोई फैसला नहीं सुनाया है। इससे जिले के सभी स्कूलों की कंप्यूटर लैबों पर ताले लटके हुए हैं। बच्चों ने का कंप्यूटर शिक्षा का सपना भी अधूरा रहता नजर आ रहा है।
वर्जन
शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बेहतर रहने की वजह से जनरेटर की व्यवस्था केवल कंप्यूटर लैब के लिए की गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को जनरेटर से जोड़ा गया है। ताकि कक्षा समय के दौरान विद्यार्थियों को गर्मी से परेशान न होना पड़े। कई स्कूलों में जनरेटर खराब हैं, उन स्कूलों के मुखिया से रिपोर्ट मांगी है। जल्द ही स्कूलों में सभी सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी करनाल।