जाट आरक्षण को लेकर भड़के आंदोलन की आग बुधवार को शांत हो गई है। जिलेभर के स्कूल कई दिन बाद खुले रहे और बाजार भी खुल गए। इससे बाजारों और शहर में चहल पहल नजर आई। लघु सचिवालय समेत सरकारी और निजी कार्यालयों में भी कर्मचारियों और लोगों की आवाजाही रही। रोडवेज बसें कई दिन के बाद सभी रूटों पर चली। हालांकि, अभी भी जिले के लोगों को ट्रेन सुविधा नहीं मिल सका है।
प्रदेश सरकार समुदाय के लोगों की मांगे मान लेने के बाद पिछले दो दिनों से सड़कों से जाम खुल गया है। स्कूल कॉलेजों में भी रौनक लौट आई है। डीसी के आदेश के बाद बुधवार को सभी सरकारी और निजी स्कूल व कालेज खुल गए। वहीं, पीड़ितों के पक्ष में मंगलवार को बंद रहे बाजार भी खुल गए और यहां पर ग्राहकों को चहल पहल नजर आई। इस आंदोलन से बिगड़ा ट्रेनों का शेड्यूल अभी तक सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।
हालांकि रेलवे अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सुबह यात्रियों को नियमित रूप से रेल सेवा देने की उम्मीद जताई है। आंदोलन की समाप्ति के दो दिन बाद भी बुधवार को दिल्ली अंबाला के बीच रेल सेवा शुरू नहीं हो सकी। यात्री दिनभर ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। पूरे दिन में केवल अप व डाउन साइड की दो ट्रेनें ही स्टेशन पर पहुंची। पूरे दिन के इंतजार के बाद रात को 11 बजे जम्मू मेल स्टेशन पर पहुंची। वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ से चलकर दिल्ली से होते हुए कानपुर जाने वाली ऊंचाहार एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर करनाल स्टेशन पहुंची। लेकिन दिनभर कोई भी पैसेंजर ट्रेन न चलने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुबह तक पहुंचेंगी लंबे रूट की ट्रेनें
जाट आंदोलन के चलते रद्द हुई ट्रेनें हालात सामान्य होने के बाद अपने अपने टर्मिनल से रवाना हुई हैं। जिनके बृहस्पतिवार को अपने निर्धारित समय पर स्टेशन पर पहुंचने की उम्मीद है। रेलवे द्वारा सभी ट्रेनों को निर्धारित शेड्यूल पर चलाने व ठप्प पड़ी सिगभनल व्यवस्था को अतिशीघ्र ठीक करने के प्रयास किया जा रहे हैं।
रोडवेज की बसें दौड़ी सभी रूट पर
बुधवार को सभी रूटों पर रोडवेज की बसें दौड़ी। बता दें कि मंगलवार तक दिल्ली और कैथल रूट बंद था। बसें निसिंग से ही वापस आ रही थी। लेकिन बुधवार सुबह से ही चंडीगढ़, दिल्ली व कैथल, जींद हिसार के लिए बसें चली। जीएम रोडवेज जयपाल राणा का कहना है कि अब बसें सुचारू रूप से चल रही हैं और सभी रूटों पर बसें भेजी गई हैं।
आंदोलन से रेलवे को 90 लाख की चपत
छह दिनों से सभी ट्रेनें बंद रहने से रेलवे को करनाल स्टेशन से ही अब तक करीब 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। करनाल स्टेशन पर प्रतिदिन 66 ट्रेनों का ठहराव होता है, जिनमें प्रतिदिन करीब 35 हजार यात्री सफर करते हैं। इससे रेलवे को जिले से ही करीब 14 लाख रुपये के राजस्व प्राप्त होता है।
लेकिन अब आंदोलन के चलते ट्रेनें रद्द होने से विभाग को करीब 90 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस बारे में स्टेशन अधीक्षक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार से यात्रियों को सभी ट्रेनें निर्धारित समय पर मिलने की उम्मीद है। विभाग द्वारा लाइनों का सर्वे व सिग्नल व्यवस्था को ठीक करने का काम पूरा कर लिया गया है।