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सैकड़ों पेड़ चढ़े आंदोलन की भेंट, अधिकारी अनजान

Thu, 25 Feb 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में जिले भर में न जाने कितने पेड़ों की बलि दे दी गई और किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। काटने वालों से तो उम्मीद ही क्या होगी, समाजसेवा और पर्यावरण के नाम पर जागरूक करने वाले भी अभी पेड़ों की तरह की खामोश हैं। विडंबना देखिये सरेआम जिले में सैकड़ों पेड़ सड़कों पर पड़े हैं और वन विभाग के अधिकारी अब कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार कर रहे हैं। विभाग के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये से करनाल की ओबा हवा साफ व स्वच्छ कैसे रहेगी?
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आंदोलन की चिंगारी से भड़की हिंसा में जिले में दर्जनों स्थानों पर पेड़ों पर सरेआम कुल्हाड़ी चली है। पेड़ों की रक्षा के लिए पहरेदारों ने एक कदम तक भी आगे नहीं बढ़ाया। उस वक्त तो नहीं, अब आंदोलन शांत होने के बाद भी विभाग को इस बात का इल्म नहीं है कि आखिर उनके पेड़ कितने कत्ल हुए हैं?

न ही वह इस बात की जानकारी लेना चाहता है कि कितने पेड़ सड़कों के किनारे पड़े हैं? आश्चर्य तो इस बात का है कि विभाग के पास पेड़ काटने वालों का न तो नाम पता है और न ही संख्या? न ही वह जानने की कोशिश कर रहा है? अब केवल नुकसान के आंकड़ों में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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कहां हैं फारेस्ट गार्ड
सवाल यह उठता है कि जिले में आंदोलन कुछ चिह्नित जगहों पर ही हुआ है, लेकिन विभाग के पास तैनात फारेस्ट गार्ड कहां पर थे? उपद्रवियों को वे नहीं रोक सके, लेकिन कम से कम नुकसान का आंकलन तो तैयार कर सकते हैं। आंदोलन की आग शांत होने के तीन दिन बाद विभाग अभी तक किसी भी आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सका है। गौरतलब है कि असंध, इंद्री, बल्ला, जुंडला व मंगलौरा समेत दर्जनों स्थानों पर आंदोलनकारियों ने हरे भरे पेड़ों की बलि ले डाली थी। मामले में डीएफओ जितेंद्र अहलावत का कहना है कि अभी कटे पेड़ों की संख्या के लिए सर्वे कराया जाएगा।

वर्जन
यह बहुत दुखद है। आंदोलन करने के लिए पेड़ों की बलि कतई नहीं होनी चाहिए। विरोध जताने के और भी तरीके हो सकते हैं। विभाग को इस मामले में तुरंत पेड़ काटने वालों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए और जो पेड़ कटे हैं उनके स्थान पर अन्य पेड़ लगाए जाने चाहिए। हम लगातार लोगों को पेड़ लगाने के लिए जागरूक कर रहे हैं और लोग पेड़ काट रहे हैं, ये शर्म की बात है। अगर विभाग ने सख्त एक्शन नहीं लिया तो वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगी।
एडवोकेट संतोष यादव, समाजसेवी।

वर्जन
रोहतक मंडल में आने वाले पांचों जिलों से आंदोलन में हुई वन क्षति पर रिपोर्ट मांगी गई है। वनों की क्षति की रिपोर्ट आने के बाद विभाग द्वारा सरकार के प्रॉपर्टी के लॉस का मामला दर्ज करवाया जाएगा।
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- घनश्याम शुक्ला, वन संरक्षक, रोहतक मंडल।
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