संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिलेभर में हुए 20 करोड़ रुपये के धान घोटाले में बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। धान की फसल के कागजों में थी। धान उगाया गया न मंडी में बिका। फर्जीवाड़ा कर भुगतान ले लिया गया। धान के लिए जो पैसा किसानों के खाते में आया उसे आढ़तियों के माध्यम से लेकर मिलर, आढ़ती, मार्केट कमेटी के अधिकारियों और खरीद एजेंसियों ने बांट लिया।
ये फर्जीवाड़ा पुलिस की जांच में सामने आया है। जांच में 25 किसान ऐसे सामने आए हैं कि जिन्होंने बताया कि उन्होंने तो धान उगाया ही नहीं था, लेकिन उनके खाते में सरकार की ओर से पैसे आए थे। उन्होंने ये पैसे आढ़तियों को दे दिए थे। पुलिस जांच कर रही है कि जो पोर्टल पर जो पंजीकरण हुए क्या उसमें किसानों की सहमति थी या घोटाले में शामिल लोगों में से किसी ने करवाए। धान घोटाले में किस अधिकारी की कितनी भूमिका है, इस बारे में पुलिस जांच कर रही है। आढ़तियों और मार्केट कमेटी के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से जिलेभर की मिलो में भौतिक सत्यापन करवाया जा रहा है।
विदित हो कि जिले में हुए 20 करोड़ रुपये के धान घोटाले में जिले के छह पुलिस थानों में अभी तक छह प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 10 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। असंध की दो मिलों राधे राधे और अग्रवाल राइस मिल में सामने आए 9.25 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपी मिलर शीशपाल और सुनील को गिरफ्तार किया जा चुका है। थाना शहर करनाल में दर्ज हुई फर्जी गेटपास प्राथमिकी में पुलिस आरोपी मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली, कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश और अंकित को गिरफ्तार कर चुकी है। जेल में पंकज तुली की हालत खराब होने के बाद उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। जहां उसकी मौत हो गई थी।
अधिकारियों की जिम्मेदारी पर उठ रहा सवाल
1. मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण : इसका पटवारी और कृषि विभाग के अधिकारियों को सत्यापन करना होता है। यहां अनदेखी हुई।
2. गेटपास : जब किसान धान लेकर आता है तो मार्केट कमेटी के अधिकारी फसल देखकर गेटपास काटते हैं। इसमें लापरवाही हुई।
3. आढ़ती : आढ़ती के पास या खरीद एजेंसी के पास गेटपास दिखाकर ही धान बेचा जाता है। इसकी निगरानी में भी चूक हुई।
4. खरीद एजेंसी : जब धान मंडी में आता है तो संबंधित खरीद एजेंसी के निरीक्षक उसकी खरीद करते हैं। निरीक्षकों ने लापरवाही की।
5. ट्रांसपोर्ट : इसके बाद एजेंसी निरीक्षक धान को मंडी से लोड करवाकर मिल में पहुंचाते हैं। ट्रांसपोर्ट का रिकॉर्ड भी फर्जी दर्ज किया गया।
6. आउटवार्ड गेटपास : धान की गाड़ी जैसे ही मंडी से बाहर जाती है तो मार्केट कमेटी की ओर से आउटवार्ड का गेटपास जारी किया जाता है। ये भी फर्जी बना होगा।
7. कांटा : मंडी से जाने के बाद कांटा पर वजन की पर्ची बनाई जाती है। पुलिस जांच कर रही है कि ये फर्जी बनाई गईं।
8. मिलर : इसके बाद यह धान मंडी में पहुंच जाता है। मिलर इसकी कुटाई करके चावल बनाता है। धान मंडी में फिर अनदेखी हुई।
जिले में धान घोटाले में दर्ज प्राथमिकियों में पुलिस की अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं। अभी तक कि जांच में सामने आया है कि मंडी में धान आए बिना ही कागजों में बेचा दिखाया गया। मामले में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। -गंगाराम पुनिया, एसपी, करनाल