प्रसिद्ध पंजाबी सूफी गायक सतिंदर सरताज की गायकी राजा कर्ण के शहर करनाल के लोगों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ गई। तीन सामाजिक मुद्दों पर विश्व रिकॉर्ड बना चुकी सामाजिक संस्था निफा की ओर से फाइव स्टार नूरमहल में आयोजित चैरिटी लाइव शो में मौजूद हर कोई सतिंदर सरताज का दीवाना दिखा।
महिलाएं और युवतियां भी सरताज की गायकी के सरूर में डूबी रहीं। सतिंदर सरताज का स्टेज पर पहुंचते ही जहां श्रोताओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया, वहीं, सरताज ने भी पूरे अदब के साथ करनाल के लोगों का अभिवादन स्वीकार करने के साथ उनका आभार जताया। सरताज ने मंगलवार देर रात तक श्रोताओं को अपनी गायकी के बल पर बांधे रखा।
शहर के लोगों ने सरताज की गायकी को गहरे अर्थ समझाने वाली होने के लिए सराहा। सरदार सतिंदर ने हाथ जोड़कर सभी लोगों को प्रणाम किया। संगीत के तमाम उपकरणों के समक्ष शीश झुकाया। इसके बाद माइक संभालते ही कहा कि ‘ओ जदो वी दिल्ली जांदे होंदे सी, चा पाणी पीन वास्ते करनाल खडे़ होंदे सी, एक आस सी थी ओना दे दिल विच, जो आज पूरी हो गई।’
यह पंक्तियां बोलते ही सरताज का आसमान में आतिशबाजी करने के साथ जबरदस्त स्वागत किया गया। इसके साथ ही सरताज ने मोहब्बत के क्षेत्र में दिल के मरीजों का दवा देकर इलाज करने के वकालत की तो उन्होंने अपनी पंक्तियों के साथ मुहब्बत के दुश्मनों का लिहाज नहीं करने का संदेश भी दिया।
साईं चरणों में की अरदास
सर्वप्रथम सरताज ने ‘साईं वे साड़ी फरियाद तेरे ताईं’ से अपने ईष्ट के श्री चरणों में प्रार्थना कर गायकी को आगे बढ़ाया। उन्होंने इस दौरान अपनी पंक्तियों में देश के बंटवारे से पूर्व का दिल दहला देने वाला पूरा हाल बातों ही बातों में समझाने के साथ कह गए कि ‘बंटवारे के बाद भी एक मिनी बंटवारा हुआ, जिसमें शिमला, चंबा, रोहतक और हिसार पंजाब थे, जो अब बदल कर कोई हिमाचल में है तो कोई हरियाणा का हिस्सा है।’
उनका संदेश था कि बंटवारा तो एक ही खराब था। दूसरे बंटवारे की जरूरत नहीं थी। सरताज की गायकी पर फिदा शो में मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। रिकॉर्डिंग में महिलाएं और युवतियां भी पीछे नहीं थी। इसके बाद ‘आज खोल दे दिल दीआ गलां सारियां, ते कुज वी लुकोई ना, ऐहो जिंदगी नी आणी वारी-वारी’ पर सब झूम उठे। सरताज अपनी गायकी में प्रेम के दीवाने हीर और रांझा का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने अपनी पंक्तियों में आज के नकली दीवानों का हाल भी बयां किया।
पंजाबी गायकी का जादू बिखेरा
सतिंदर ‘जे साडी तकदीर विच फतेह इबारत लिखी होई, तां फेर रब ने कदमा नूं भी डोलण नहीं देना, जे वैरी गुलदस्ता लैके नहीं आया, ते आपां ने वी किले दा बुआ खोलण नहीं देना’ पंक्तियों पर भी तालियां बटोर गए। ‘
असीं घूमण निकले जीप विच, जिसने जल गंदा कीता, पालकी जड़ियां बैला विच, हुण देर नहीं दिना चे’, ‘रब छेती करा तू बल्ले-बल्ले’, ‘अफसाने सुन-सुन के जिंदगी उलझ गई’, ‘मेरी जिंदगी भी एक नाटक’ समेत ‘यमहा-यमहा’ समेत आधी रात के बाद तक शहर के लोग सरताज के दीवाने रहे। सरताज ने अपनी गायकी के जरिए मोहब्बत के इतिहास के तमाम पन्नों को धीरे-धीरे संयम के साथ पलटा।
यही खास कला थी जो लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गई। शो के दौरान श्रोता कहते सुने गए कि गायक ऐसा ही होना चाहिए। हर कुछ उसका अपना बनाया हुआ है। आवाज में पंजाब की किलकारी का दम है।
पन्नू पंजाबी सभा हरियाणा के अध्यक्ष मनोनीत
पंजाबी सभा के अध्यक्ष हरीश ओबराय ने निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू को पंजाबी सभा का हरियाणा का अध्यक्ष बनाने की घोषणा की। उन्होंने पन्नू के इस कार्यक्रम को बखूबी सराहा और आश्वासन दिया कि उन लोगों से जो बन पडे़गा, वे सहयोग करेंगे।
सामाजिक संस्था निफा के राष्ट्रीय चेयरमैन पन्नू ने कहा कि संस्था ने सौ ऐसे बच्चों को गोद लेने का काम शुरू किया है, जो कूड़ा बीनते हैं। रात में भूखे पेट सोते हैं। समाज की मुख्यधारा से कटे हैं। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए वे और संस्था प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने करनाल के ऐसे लोगों से नाराजगी जाहिर की, जो संपन्न होने के बावजूद सामाजिक सरोकार के मुद्दों को जानना दूर उनको छूना भी नहीं चाहते। केवल पैसा बचाने के लिए। उन्होंने कई ऐसे प्रभावी लोगों का जिक्र किया, जिन्होंने कुछ खर्च नहीं करने के बावजूद शो देखने के लिए पास मांगे।
विधायक ने की सराहना
विधायक सुमिता सिंह ने संस्था के इस प्रोजेक्ट की सराहना की। साथ ही निफा की ओर से गोद लिए पांच बच्चों को गोद लेने के साथ उनका पूरा खर्च अदा करने की घोषणा की।
मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वीसी लेफ्टिनेंट जरनल डीडीएस संधू, आरपीआईआईटी से राजीव सिंघल, भारत भूषण, त्रिलोचन, नेफ्को के अध्यक्ष एसपी चौहान, आईजी वी कामराजा, नूर महल के डायरेक्टर कर्नल मनबीर सिंह, मुकेश चोपड़ा, एडवोकेट नरेश बराना मौजूद रहे।