संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राजकीय स्कूलों में किशोरियों के लिए सैनिटरी पैड वितरण योजना की स्थिति संतोषजनक नहीं है। दिसंबर में जनवरी, फरवरी और मार्च माह की जरूरत को देखते हुए 65,442 सैनिटरी पैड का ऑर्डर दिया गया था। इसे जनवरी के पहले सप्ताह तक सभी 178 स्कूलों में पहुंचना था। मार्च समाप्ति के करीब है और अब तक केवल 36 स्कूलों तक ही सप्लाई हो सकी है। 142 स्कूलों में पैड की आपूर्ति नहीं हो पाई है।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में दिसंबर में जारी ऑर्डर जनवरी में ही आ जाना चाहिए था लेकिन थोड़ा-थोड़ा आ रहा है। जहां से ऑर्डर आना है वहीं से देरी हो रही है। जिले में जो ऑर्डर आ रहा है कंपनी की गाड़ियां सीधे ही स्कूलों में उन्हें पहुंचा रही है। 13 से 21 फरवरी के दौरान सप्लाई प्रक्रिया शुरू हुई है। नूवा कंपनी की ओर से शुरुआत में सीमित संख्या में स्कूलों तक ही स्टॉक पहुंच पाया, जिसके बाद अब यह संख्या बढ़कर 36 तक पहुंची है।
अब तक जिन स्कूलों तक सैनिटरी पैड पहुंचे हैं, उनमें 7 माध्यमिक और 29 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। सप्लाई का अधिक हिस्सा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों तक ही सीमित रहा है, जबकि बड़ी संख्या में अन्य स्कूल अब भी इस सुविधा से वंचित हैं। 65 हजार से अधिक पैड के ऑर्डर के मुकाबले अब तक करीब 20 हजार के आसपास ही पैड स्कूलों तक पहुंचे हैं।
- इन 36 स्कूलों में पहुंचे पैड
जिले के जिन 36 स्कूलों में अब तक सैनिटरी पैड पहुंचे हैं, उनमें कलमपुरा, मधुबन, नलवीपर, कुलवेहड़ी, भूसली, बलड़ी, अर्बन एस्टेट और कंबोहपुरा के माध्यमिक विद्यालयों और काछवा मॉडल संस्कृति, पुंडरक, प्रेम नगर स्वतंत्रता सेनानी आर्य, करनाल राजकीय कन्या मॉडल संस्कृति, मोहीदीनीपुर, ढाकवाला गुजरान, कुंजपुरा, कुंजपुरा पीएमश्री, सुभरी, मंगलपुर, डरार, संगोहा, बड़ा गांव पीएमश्री, सोहाना, नगला मेद्या, डबरकी कलां, महमदपुर, उचाना, टिकरी, टपराना, चौरपुरा, रांबा, घीड़, बजीदा जटां, डाहा, मॉडल संस्कृति मॉडल टाउन और ऊंचा समाना शामिल हैं। इन स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग तारीखों पर सप्लाई भेजी गई।
- छात्राओं पर असर
लगातार देरी और अनियमित सप्लाई का सीधा असर छात्राओं पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में छात्राओं को मासिक जरूरतों के लिए खुद इंतजाम करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है, जहां संसाधनों की कमी के कारण छात्राएं स्कूलों पर ही निर्भर रहती हैं।
वर्जन-
जिस कंपनी से जितना स्टॉक आया है वह स्कूलों में पहुंच रहा है। इसके लिए स्कूलों में कंपनी की ओर से दो स्टॉक स्कूलों में पहुंचा रही हैं। -सुमित मान, डीएमएस व नोडल अधिकारी