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श्मशान भूमि नहीं मिली तो गांव छोड़ देंगे लोग

Sun, 02 Oct 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
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गांव छोड़ने का अल्टीमेटम देते लोग - फोटो : amar ujala
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पीर बड़ौली गांव में शनिवार को महापंचायत के बाद लोगों ने निर्णय लिया कि यदि सरकार ने श्मशान भूमि उपलब्ध नहीं कराई तो वे गांव छोड़ देंगे। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए श्मशान भूमि दिए जाने की मांग उठाई। इससे पूर्व ग्रामीण प्रशासन को घरों में दाह संस्कार करने का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं।  
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वर्षों पहले यमुना में आई बाढ़ से उजड़ा गांव पीर बड़ौली एक बार फिर सुनसान होने की राह पर है। वर्ष 1988 में सरकार ने बेघर हुए ग्रामीणों को सदरपुर गांव के पास जमीन दी और पीर बड़ौली गांव को फिर से बसाया गया। पीर बड़ौली के ग्रामीणों को रहने के लिए छत तो नसीब हुई, लेकिन श्मशान के लिए जगह नहीं मिली। शनिवार को श्मशान के मुद्दे पर गांव में महापंचायत बुलाई गई। पंचायत की अध्यक्षता पूर्व सरपंच मेहर सिंह व पूर्व सरपंच गोबिंद ने की। इस दौरान आगामी रणनीति को लेकर ग्रामीणों से सलाह मशविरा किया। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए श्मशान के लिए भूमि दिए जाने की मांग की। करीब एक घंटा चली इस पंचायत में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गांव छोड़ने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने ऐलान किया की वे गांधी जयंती पर गांव छोड़कर बीडीपीओ दफ्तर में डेरा डालेंगे। 

पंचायत में शामिल पूर्व सरपंच मेहर सिंह, पूर्व सरपंच गोबिंद, बलवान, प्रेम, बदलू, जयपाल, रामप्रसाद, रामसिंह, सतबीर, बलजीत, विनोद, राजकुमार, दीपू, रोहित, अशोक व अन्य ने कहा कि उन्हें हर हाल में श्मशान के भूमि चाहिए। 
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ग्रामीण सुनीता, पिंकी, बबली, रानी, नानकी देवी, ममता, संतरों, महेंद्रो, सीमा, राजकली, नीतू, सरोज, अंजू, करेशनी, मीनू, बोहती, माया, किरण व अन्य ने कहा कि एक और सरकार स्वच्छता का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन जब गांव के पास न तो श्मशान भूमि है और न ही कूड़ा व गोबर डालने की जगह तो गांव स्वच्छ कैसे होगा?

आप सदस्यों ने किया समर्थन 
श्मशान भूमि के लिए ग्रामीणों के आंदोलन को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समर्थन देने का एलान किया है। गांव में हुई पंचायत में शामिल हुए आप सदस्य अनूप संधू, आमिर प्रोचा, जेपी शेखपुरा, दिनेश, संदीप व अन्य ने कहा कि ये बेहद भावनात्मक मुद्दा है। ग्रामीण लंबे अरसे से गांव में श्मशान भूमि की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ग्रामीणों की मांग को अनदेखा कर रही है। ग्रामीणों के समर्थन में उतरे आप सदस्यों ने एलान किया उनकी पार्टी इस आंदोलन में गांव के साथ हैं और दो अक्तूबर कर ग्रामीणों के साथ बीडीपीओ कार्यालय का घेराव किया जाएगा। 
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श्मशान भूमि को लेकर पूरे गांव की पंचायत बुलाई गई थी। इसमें ग्रामीणों के अलावा पूर्व सरपंचों व पंचायत सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस पंचायत में सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया कि सरकार उनकी मांग के प्रति गंभीर नहीं लिहाजा गांधी जयंती पर पूरा गांव पलायन करेगा।
-अशोक कुमार, सरपंच, पीर बड़ौली। 
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जब से मैं विधायक बना हूं, सबसे पहले पीर बड़ौली में विकास शुरू कराया। गांव की गलियां पक्की कराईं, पानी निकासी के लिए थ्री पोंड सिस्टम शुरू कराया। श्मशान घाट की भूमि का मुद्दा मेरी जानकारी में है, हम इसका समाधान तलाश रहे हैं। ग्रामीणों को घर नहीं छोड़ना चाहिए। कुछ लोग इस मामले में घटिया राजनीति कर रहे हैं। गांव के पास जमीन तलाशी जा रही है। 
- हरविंद्र कल्याण, विधायक, घरौंडा।
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घरौंडा हलके में बढ़ रहा है घर छोड़ने का प्रचलन
घरौंडा हलके में समस्या का समाधान नहीं होने पर गांव छोड़ने का प्रचलन बढ़ रहा है। बता दें कि तीन माह पहले रसूलपुर गांव ने मक्खियों के आतंक से परेशान होकर घर छोड़ दिया था। करीब छह माह पहले दबंगों के साथ विवाद के चलते एक दलित परिवार ने गांव कुटेल को छोड़ दिया था। वहीं तीन दिन पहले चकबंदी पीड़ितों ने भी गांव छोड़कर चंडीगढ़ की ओर कूच किया था। अब दोबारा से चकबंदी पीड़ित अमृतपुर कलां, कालरम समेत पांच गांव के लोग वहां से जाने की तैयारी कर रहे हैं।  
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