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रोडवेज का चक्का जाम, प्राइवेट बसों में भी नहीं मिली जगह

Tue, 11 Apr 2017 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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रोडवेज का चक्का जाम, प्राइवेट बसों में भी नहीं मिली जगह - फोटो : Amar Ujala
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निजी बसों को परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों की ओर से मंगलवार से शुरू किए गए अनिश्चितकालीन हड़ताल से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बसें न मिलने के कारण यात्री घंटो इधर से उधर भटकते रहे। कुछ निजी वाहनों का सहारा लेकर अपने गंतव्य स्थल पहुंचे तो कुछ वापस घर लौट गए।  
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वहीं रोडवेज कर्मचारी दिनभर बस स्टॉप के अंदर बैठकर रागिनी का आनंद उठाते रहे। हरियाणा रोडवेज की कर्मचारी यूनियन भारतीय मजदूर संघ, महासंघ, इंटक, ऑल हरियाणा कर्मचारी संघ, संयुक्त कर्मचारी संघ, ड्राइवर संघ, रोडवेज कर्मचारी एससी सेल के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की ओर से तालमेल कमेटी का गठन कर हड़ताल की गई। हड़ताल में रोडवेज के सैकड़ों कर्मचारियों ने पहुंचकर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की निंदा की व विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य कारण हाल ही में हुई 273 परमिट दिए जाने की घोषणा है। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि सरकार आहिस्ता आहिस्ता रोडवेज को निजी हाथों में देना चाहती है जो कि रोडवेज कर्मचारियों को गवारा नहीं है। निजी बसों के परमिट बढ़ाने की बजाय रोडवेज बेड़े में बसों को शामिल किए जाना चाहिए। जिसके चलते अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके और आमजन को बेहतर सुविधा मिल सके।

डिपो से नहीं चली एक भी बस
करनाल डिपो के अंतर्गत 183 बसें हैं जो विभिन्न रूटों पर चलकर यात्रियों को यातायात की सुविधा प्रदान करती हैं। डिपो में करीब दस बसें लड़कियों के लिए लगाई गई हैं। मंगलवार को हड़ताल के कारण एक भी बस नहीं चली। जिसके चलते बस स्टैंड और आसपास सवारियों का भारी जमावड़ा देखने को मिला। हड़ताल में सबसे अधिक परेशानियों का सामना बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को करना पड़ा। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी अपने गंतव्य स्थानों तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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निजी समितियों द्वारा चलाई जा रही हैं 75 बसें
सरकारी बसों के अलावा निजी 75 बसें निजी समितियों के द्वारा चलाई जा रही हैं। जो मंगलवार को यात्रियों की सहारा बनी। हड़ताल के चलते ये बसों  मंगलवार को ओवरलोड होकर चली। यात्री भी जल्द से जल्द अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचने के लिए इन बसों में लटके नजर आए। छोटे रूटों पर चलने वाली प्राइवेट बसों को भी परिवहन समितियों के संचालकों ने लॉन्ग रूट बनाकर अधिक मौके का फायदा उठाया गया। आलम यह था कि प्राइवेट बसें जैसे ही बस स्टैंड पर पहुंचती थी सवारियां पहले ही इंतजार में मौजूद खड़ी थी। बसें आते ही पूरी भर जाती थी जिसके चलते निजी बस संचालकों की कमाई कई गुणा बढ़ गई। वहीं हड़ताल के मद्देनजर बस स्टैंड पर मौजूद पुलिस बल ने बस स्टैंड के सभी गेट्स को बंद कर दिया गया। जिसके चलते सवारियों को सड़क पर खड़े होकर बसों व अन्य यातायात साधनों का इंतजार करना पड़ रहा था। जिसके चलते बस स्टैंड के आस पास की सड़कों पर जाम की सी स्थिति उत्पन्न हो गई।

सांभली जाने के लिए मैं यहां पर सुबह बस का इंतजार कर रहा हूं, कोई बस नहीं मिली। कुछ टैक्सी वालों से बात की, वे बहुत ज्यादा पैसा मांग रहे हैं, जो मैं नहीं दे सकता। लगता नहीं कि शाम तक घर पहुंच पाऊंगा।
-सोया राम, सांभली

अपने परिवार के साथ परिचित के यहां आई थी, आज घर जाना था, लेकिन कोई सवारी नहीं मिल रही। प्राइवेट बसें तो चल रही हैं, लेकिन उनमें बच्चों के साथ नहीं चढ़ सकती। बहुत परेशानी है।
-बाला देवी, असंध

जरूरी काम से जठलाना स्थित अपने रिश्तेदार के यहां जाना था। कई घंटे से बस या अन्य सवारी का इंतजार कर रही हूं, लेकिन कोई सवारी नहीं मिली। प्राइवेट बसों में चढ़ने की हिम्मत नहीं है, इसलिए घर जाना पड़ेगा।
- ओमी देवी, कंबोपुरा

मैं दवा लेने के लिए करनाल आया था, आज घर जाना था। कई घंटे से इंतजार कर रहा हूं, लेकिन बस नहीं मिल रही। जो प्राइवेट बसें आ रही हैं, वे खड़ी होने से पहले ही फुल हो जा रही। मैं दिव्यांग होने के कारण बस में नहीं चढ़ पा रहा। अब समझ में नहीं आ रहा कि घर कैसे जाऊं।
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- शिवनाथ, काछवा
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