राष्ट्रीय राजमार्ग अंबाला रोड पर ड्रेन से कैथल रोड तक रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार हालात यहां तक हो जाते हैं कि किसी मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस जाम में फंस जाती है।
शहर में बाईपास बनाने की मांग पिछले कई सालों से उठ रही है, लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नही दे रही है। प्रदेश के कई मंत्री अपने पिहोवा दौरे के दौरान बाईपास बनाने की घोषणा कर चुके हैं, फिर भी स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली है।
हालात यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों को रेंग-रेंग कर आगे बढ़ना पड़ता है। इतना ट्रैफिक होने के बावजूद भी कस्बे में न तो किसी जगह लाल बत्ती की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस। वाहनों की अधिक भीड़ और आए दिन लगने वाले जाम के कारण सड़क हादसों में भी वृद्धि हो रही है।
हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम का सबसे बड़ा कारण हाईवे के दोनो ओर दुकानदारों द्वारा किया अतिक्रमण है। दुकानदारों ने सड़क के दोनों ओर अपनी दुकानों के सामने सामान इतना बाहर तक रख लिया है कि गुजरने वाले ट्रकों और ट्रालों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती और उनके पीछे वाहनों की कतारें लग जाती हैं।
जाम के बीच से निकलने का प्रयास करने वाले दोपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग अक्सर दुर्घटना का शिकार बन जाते हैं। नगरपालिका द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने के समय दुकानदार अपना सामान उठा लेते हैं, लेकिन नपा कर्मियों के जाते ही सामान फिर से हाईवे पर आ जाता है।
कस्बे के मेन बाजार का हाल तो सबसे ज्यादा बुरा है। बाजार में कहीं भी वाहन खड़ा करने के लिए पार्किंग व्यवस्था नहीं है। वाहन चालक अपनी मर्जी से सड़क पर ही वाहनों को आडे़ तिरछे खड़ाकर खरीदारी के लिए चले जाते हैं, जिससे बाजार में भी जाम लग जाता है।
प्रशासन ने मेन चौक से लेकर बाजार तक पार्किंग के लिए सड़क के साथ जगह बनाई गई थी, ताकि कुछ हद तक जाम की समस्या से निपटा जा सके। दुकानदारों और रेहड़ी वालों द्वारा इस जगह पर अवैध कब्जा कर इस समस्या को ओर ज्यादा बढ़ा दिया है।