करनाल। बीरू वाल्मीकि की हत्या में शामिल बताए गए हर्ष और बीरबल को मुठभेड़ में मार गिराए जाने के मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को दिए जाने पर रोड़ समाज को एतराज है। मुठभेड़ के फर्जी होने का दावा कर रही अखिल भारतीय रोड़ महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सीएम नायब सिंह सैनी से मिलकर न्यायिक जांच की मांग की थी। इसके बावजूद जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी नहीं है। यह मंजूर नहीं है। इससे सच सामने आ पाने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में समाज ने 24 अगस्त को विरोध-प्रदर्शन का जो एलान किया था, उसी के अनुरूप रोष जाहिर किया जाएगा।
महासभा के अध्यक्ष बलकार सिंह का कहना है कि 14 अगस्त को समाज के प्रतिनिधि मंडल ने चंडीगढ़ में सीएम से मिलकर चार मांगें रखी थीं। ये हैं मुठभेड़ की जांच किसी न्यायाधीश से कराई जाए, करनाल के एसपी नरेंद्र बिजरानिया का तबादला किया जाए, फर्जी मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए और इस मामले में बयानबाजी करने वाले करनाल के भाजपा विधायक जगमोहन आनंद से जवाब तलब किया जाए। इनमें से कोई मांग पूरी नहीं की गई है। सरकार की ओर से 18 अगस्त को जांच का आदेश जारी किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक संजय कुमार के नेतृत्व में स्टेट क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी गई है। बीरू की हत्या पांच अगस्त की रात साढ़े आठ बजे की गई थी। छह अगस्त की रात साढ़े बारह बजे पुलिस ने दावा किया था कि हर्ष और बीरबल मुठभेड़ में मारे गए। इन दोनों ने ही बीरू की हत्या की थी। आईजी अशोक कुमार ने कहा था कि मुठभेड़ अचानक हुई। बदमाशों ने पुलिस पर गोली चलाई। जवाबी फायरिंग में बदमाश मारे गए।
लोग पूछ रहे हैं-छाती में गोली क्यों मारी - बलकार सिंह का कहना है कि समाज के लोग सवाल कर रहे हैं कि पुलिस ने हर्ष की छाती में गोली क्यों मारी? अगर यह मान लिया जाए कि पुलिस से उसकी मुठभेड़ हो गई थी, तो भी पैर में गोली मारनी चाहिए थी। परिजन और अन्य लोगों ने यह भी बताया है कि हर्ष ने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद उसे मुठभेड़ दिखाकर नहीं मारा जाना चाहिए था। बीरू की हत्या के मामले में जो एफआईआर दर्ज कराई गई, उसमें हर्ष का नाम नहीं है। हर्ष के ताऊ बनारसी का कहना है कि पुलिस ने छह गोलियां मारीं। वह ऐसा लड़का नहीं था, जैसा सुलूक पुलिस ने उसके साथ किया। इसी वजह से समाज में इतना गुस्सा है।
विधायक के 3 बयान पर गुस्सा
बलकार सिंह का कहना है कि समाज के लोगों में विधायक जगमोहन के तीन बयान पर गुस्सा है। बीरू की हत्या के बाद जो लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, उनसे विधायक ने कहा था कि 10 घंटे के भीतर पुलिस रिजल्ट दे देगी। इसके बाद कहा कि लिखकर ले लो, ठोस कार्रवाई होगी। बलकार सिंह का सवाल है कि विधायक को कैसे पता था कि 10 घंटे में पुलिस कार्रवाई करने जा रही है। तीसरा बयान इसके बाद आया। मीडियाकर्मियों के सवाल पर विधायक ने कहा था कि अगर चलती में नहीं चलाएंगे तो कब चलाएंगे। बलकार सिंह का कहना है कि विधायक ने ऐसा क्यों कहा, इसका स्पष्टीकरण आना चाहिए। हालांकि, विधायक इन बयानों पर स्पष्टीकरण दे चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने बीरू के परिजनों को हत्यारोपियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यह स्पष्ट रूप से कहा था कि कार्रवाई कानून के दायरे में होगी।
17 राज्यों में होगा उग्र आंदोलन की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय स्वाभिमानी मराठा महासंघ ने भी शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष मराठा सुनील सागवाल ने बुधवार को कहा कि अगर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। महासंघ के बैनर तले देश के 17 राज्यों में मराठा समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। समाज अपने युवा सदस्य हर्ष मराठा के साथ किसी भी सूरत में अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ढिलाई के कारण पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे पूरे देश के मराठा समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।