गांव हरिसिंहपुरा में 50 फीट गहरे बोरवेल में गिरी पांच वर्षीय मासूम शिवानी को 10 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी नहीं बचाया जा सका। करीब आठ घंटे बाद शुरू हुए ऑपरेशन में पहले जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंच कर प्रयास किया। इसके बाद साढ़े तीन बजे गाजियाबाद से एनडीआरएफ के 37 जवान गांव पहुंचे। उन्होंने सुबह चार बजे बचाव कार्य शुरू किया। पांच घंटे बाद सुबह 9 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया। बच्ची को तुरंत एंबुलेंस से कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। जांच के बाद वहां डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। मौत की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में मातम छा गया। रातभर ग्रामीण और अन्य लोग उसकी सलामती की दुआ मांग रहे थे। तीन डॉक्टरों के पैनल ने शिवानी की मौत दम घुटने से होनी बताया है। दोपहर बाद पोस्टमार्टम करने के शव परिजनों को सौंप दिया गया। इससे पहले रेस्क्यू आपरेशन के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने शिवानी को वायर और कैमरे की मदद से उसको बाहर निकाला। बोरवेल में टीम द्वारा एक वायर भेजी गई उसके साथ कैमरा भी भेजा। वायर में लगा हुक शिवानी के पांव में अटकाकर उसको ऊपर की तरफ खिंचा गया।
परिजनों को छह घंटे बोरवेल में गिरने की जानकारी मिली
शिवानी रविवार दोपहर तीन बजे बोरवेल में गिरी थी। जब वह बोरवेल में गिरी तो रेत भी उसके ऊपर गिरी। इस कारण वह रेत के नीचे दब गई। सिर्फ उसका पांव ही रेत के बाहर था। ऐसे में 18 घंटे तक वह रेत में दबी रही। बोरवेल में गिरने के 6 घंटे बाद परिजनों को पता चला की शिवानी बोरवेल में गिरी है। इसके बाद करीब 11 बजे जिला प्रशासन द्वारा खुदाई का कार्य शुरू कराया गया। साढ़े तीन बजे गाजियाबाद से एनडीआरएफ के 37 जवान गांव में पहुंचे, सुबह 4 बजे उन्होंने आपरेशन चलाया और फिर पांच घंटे बाद सुबह 9 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया। देर शाम सूचना मिलने के बाद विधायक हरविंद्र कल्याण, जिला उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, जिला पुलिस कप्तान, डीएसपी रामदत्त, एसडीएम गौरव कुमार रात को ही घटना स्थल पर पहुंच गए थे। उन्होंने रात को करीब 11 बजे बच्ची को निकालने का प्रयास किया। प्रशासन ने करीब चार जेसीबी मशीन, एक पोपलेन और ट्रैक्टरों के साथ बोरवेल से पास से मिट्टी हटाने का कार्य शुरू किया। बाद में जिला प्रशासन ने गाजियाबाद में एनडीआरएफ की 37 सदस्यीय टीम को बुलाया।
पहले कैमरे से की मॉनीटरिंग
एनडीआरएफ की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर अपना आपरेशन शुरू किया। टीम ने जमीन की खुदाई के अलावा जिस बोरवेल में शिवानी फंसी हुई थी, उसमें वायर हुक एंड क्लाथ वेक्ट से नीचे बच्ची तक एक तार पहुंचाया। सर्वप्रथम टीम ने कैमरे और लैपटॉप से बच्ची की मॉनिटरिंग की। यह कार्य करीब पांच घंटे तक चला।
दो अक्तूबर को मनाया था जन्मदिन, नई ड्रेस में परी जैसी लग रही थी शिवानी
मृतक के दादा रामकरण ने बताया कि शिवानी 2 अक्तूबर को पांच वर्ष की हुई थी। उसका जन्मदिन खुशी के साथ मनाया था। शिवानी नई ड्रेस में परी जैसी लग रही थी, लेकिन मां-बाप की यह परी अब उनके बीच में नहीं है। परिजन अपनी मासूम बच्ची को याद करके रो रहे है। परिजनों के मुताबिक, शिवानी उनकी बड़ी बेटी थी। उससे छोटी बेटी सिया है, जो अभी तीन वर्ष की है। शिवानी गांव के सरकारी स्कूल में पहली कक्षा की छात्रा थी।
छह माह पहले करवाया था बोर
बच्ची के दादा रामकरण ने बताया कि लगभग छह माह पूर्व ट्यूबवेल की बॉकी फंस गई थी। इस कारण दूसरा ट्यूबवेल लगवाना पड़ा। बोरवेल करीब ढाई सौ फीट गहरा था लेकिन उसके अंदर मिट्टी डाल दी गई थी। लगभग बोर अभी भी पचास फीट गहरा था। इसको ऊपर से मिट्टी की बोरी डालकर ढक दिया गया था। बारिश के कारण बोरी की मिट्टी बह गई। यह बोरवेल घर के गेट से लगभग दस मीटर की दूरी पर है।
शिवानी को बोरवेल से निकाल लिया गया है। एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई थी। करीब 10 घंटे रेस्क्यू चला है। इसके बाद बच्ची को सुबह लगभग नौ बजे निकाला गया। एंबुलेंस से बच्ची को करनाल अस्पताल ले जाया गया है। - डीएसपी रामदत्त, घरौंडा
बच्ची को बचाने के लिए डॉक्टरों की स्पेशल टीम तैनात की गई थी। मासूम को बचाने के प्रयास किए लेकिन बच्ची को बचाया ना जा सका। -डॉ. अश्विनी आहुजा, नागरिक अस्पताल करनाल