भारतीय खाद्य निगम में नौकरी देने के नाम पर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। बताया जा रहा है कि चार लोगों को नाम बदलकर श्रमिक की नौकरी दे दी गई। आरोप है कि चारों लोग अपना नाम बदलने का राशन कार्ड बनवाने के साथ तमाम सरकारी सबूत एकत्रित कर नौकरी पाने में सफल रहे हैं।
एफसीआई में गलत ढंग से नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ यह दावा एंटी क्रप्शन पब्लिक पावर के राज्य अध्यक्ष अश्विनी दत्ता ने किया है। दत्ता ने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारियों ने चार ऐसे श्रमिकों को नौकरी प्रदान की है, जो अपना नाम व अन्य सबूत नए ढंग से बनवाकर गलत तरीके से नौकरी पाने में सफल रहे हैं।
एफसीआई के इन श्रमिकों को दी गई नौकरी संबंधी असलियत जानने के नाम पर निगम के रिकॉर्ड के पन्नों को तसल्ली से उलटा जाए तो पूरा मामला साफ हो जाएगा, बल्कि गलत ढंग से नौकरी पाने वाले और नौकरी देने वालों पर कानून की गाज गिरने से भी कोई नहीं रोक पाएगा। हाईकोर्ट के आदेशानुसार गठित आरपी बजाज कमेटी के तहत 235 लोगों को श्रमिक की नौकरी देने के आदेश दिए गए थे।
उनमें शामिल चार श्रमिक ऐसे हैं, जिनके नाम पर दूसरे लोगों को नौकरी लगा दिया गया है। नौकरी भी बहुत चालाकी के साथ पाई जाने के हथकंडे अपनाए गए। चारों लोगों ने लिस्ट के अनुसार नाम बदले और तमाम जरूरी सबूत भी तैयार किए। ऐसे में उन लोगों को नौकरी नहीं मिल पाई, जो सही मायने में हकदार थे।
दो लोग तो इसमें ऐसे हैं, जो रहते कहीं है और पता कहीं और का दिया गया है। राज्य अध्यक्ष अश्विनी दत्ता ने कहा कि नौकरी पाने वाले चारों लोगों की गहराई से जांच कराई जाए तो पूरा मामला खुल जाएगा। इतना ही नहीं, नौकरी देने वाले लोगों की भी गहनता के साथ जांच हो तो सब साफ हो जाएगा। इन दिनों यह मामला पूरे निगम कार्यालय में चर्चा बना है। यह सही है जांच के दौरान मामला सही पाया गया तो निश्चित तौर पर नौकरी पाने वाले और देने वाले लोगों को कानून की कड़ी मार से कोई नहीं बचा पाएगा।
पुलिस वेरिफिकेशन पर दी गई नौकरी
चारों श्रमिकों को पुलिस वेरिफिकेशन के आधार पर नौकरी दी गई है। शहर के गणमान्य लोगों में शामिल लोगों की शिनाख्त के आधार पर उन लोगों के कागजात नौकरी के लिए तैयार किए गए होंगे। इसके बावजूद भी इन लोगों ने कुछ गलत किया होगा तो ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
एसएस सिंगला, एरिया प्रबंधक, एफसीआई, करनाल