करनाल। पेपरलेस व्यवस्था होते ही रजिस्ट्री प्रक्रिया ठप हो गई है। लोगों के कागजी प्रक्रिया में उलझने के कारण 99 प्रतिशत तक रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में जनता को तो परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं सरकार का भी पिछले 10 दिनों में करीब 25 करोड़ रुपये का राजस्व अटका है। प्रदेश सरकार की ओर से पहली नवंबर को पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की गई है। तब से लेकर आज तक महज 25 रजिस्ट्री ही हो पाई हैं। जबकि पहले रोजाना पूरे जिले में 250 रजिस्ट्री होती थी। अब नए पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों के कारण टोकन भी नहीं कट पा रहे हैं।
राजस्व विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पोर्टल को अपडेट भी किया जा रहा है, साथ ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान आने वाली कठिनाइयों का भी समाधान ढूंढा जा रहा है। लेकिन हालात यह हैं कि अपडेशन की प्रक्रिया काफी धीमी है, ऐसे में पेपरलेस व्यवस्था में रजिस्ट्री कराने के लिए लोग दस्तावेज लेकर चक्कर काट रहे हैं। किसी के दस्तावेजों में कमी है तो उसमें सुधार कराया जा रहा है तो किसी के पास रजिस्ट्री कराने के लिए मालिकाना हक संबंधित पूरे दस्तावेज नहीं हैं, तो ऐसे लोग दस्तावेज पूरा करने में लगे हुए हैं।
तहसील कर्मचारियों के अनुसार, लोग जानकारी लेने तो रोजाना तहसील में पहुंचते हैं, लेकिन टोकन एक या दो लोगों का ही कट पाता है। इन्हीं की ही रजिस्ट्री होती है। अन्य लोग दस्तावेजों की कमी व प्रक्रिया को पूरा न कर पाने के कारण रजिस्ट्री नहीं करा पाते। करनाल जिले की सभी आठ तहसील और सब तहसील में हर माह में करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व रजिस्ट्री से प्राप्त होता है। इसमें ज्यादा राशि स्टांप ड्यूटी की रहती है और 10 प्रतिशत राशि पंजीकरण फीस के रूप में होती है।
आपत्तियां
- लोग जब फाइल को ऑनलाइन सबमिट करते हैं, तो अधूरे दस्तावेज पाए जा रहे हैं।
- अधिकतर ऑब्जेक्शन में आधार कार्ड और नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी नहीं मिल रही।
- रजिस्ट्री आवेदन करते समय प्रक्रिया बीच में ही छोड़ रहे हैं, जिस कारण फाइल रद्द हो रही है।
- ऑनलाइन पंजीकरण के बाद उपभोक्ता अपाॅइंटमेंट स्लॉट बुक करने में भी देरी कर रहे हैं।
रोजाना दो या चार टोकन ही लग रहे
प्रदेश सरकार ने तहसीलों में भ्रष्टाचार को खत्म करने और आमजन को लंबी कागजी प्रक्रिया से बाहर लाने के लिए पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया को शुरू किया है। सिर्फ करनाल तहसील में तीन नवंबर को पहले दिन जिले में एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। जबकि दूसरे दिन चार टोकन लगे थे। प्रशासन ने इस प्रक्रिया से काफी राहत होने का दावा किया था लेकिन लोगों को अभी प्रक्रिया के समझने में समय लग रहा है। अब स्थिति ऐसी है कि रोजाना दो या चार टोकन ही लग पा रहे हैं।
ऑफलाइन रजिस्ट्री कराने की रही मारामारी
सरकार की ओर से करनाल में पहले अक्तूबर माह में ही रजिस्ट्री प्रक्रिया ऑनलाइन करने की बात कही गई थी। इसे लॉन्च भी किया गया था। लेकिन दिक्कतों के कारण यह सिरे नहीं चढ़ पाई। इस कारण सितंबर और अक्तूबर माह में उन लोगों ने भी ऑफलाइन प्रक्रिया में रजिस्ट्री कराई, जिनके इकरारनामे की तिथि नवंबर या दिसंबर की थी। ऐसे में पिछले दो माह में सभी तहसीलों में ज्यादा टोकन कटे थे।
इकरारनामा खत्म होने को, एडवांस ने बढ़ाई चिंता
शिव कॉलोनी के विवेक और सेक्टर-4 के विजय चुघ ने बताया कि उन्होंने मकान व दुकान खरीदने के लिए जुलाई माह में ही इकरारनामा किया था, छह माह के इकरारनामे के खत्म होने की तिथि नजदीक है। लेकिन उनकी रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज प्रक्रिया बाधा बन रही है। कई दस्तावेजों की कमी है, ऐसे में उन्हें एडवांस दिए गए रुपयों की भी चिंता है। यदि इस माह के अंत तक रजिस्ट्री नहीं हुई तो रुपये डूब भी सकते हैं।
सोमवार को भी तीन रजिस्ट्री हुई थीं। अभी जिन रजिस्ट्री में दस्तावेज कम हैं या सामान्य है, उनकी प्रक्रिया आसानी से पूरी हो रही है। इसके टोकन भी कट रहे हैं। आने वाले दिनों में भी जिनके टोकन कटते रहेंगे, उनकी रजिस्ट्री पोर्टल अपडेट होने के कार्य के साथ-साथ भी की जाएगी। - राजेश खुराना, नायब तहसीलदार करनाल