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नियम न मानने पर स्कूल वाहन होंगे जब्त

Sat, 19 Dec 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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जिले की सड़कों पर हजारों की संख्या में बेलगाम और नियमों से बेपरवाह दौड़ रहे स्कूली वाहनों पर अब नकेल कसने की तैयारी है। निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूल वाहनों की खैर नहीं। इस बार स्कूल वाहनों के लिए सीसीटीवी कैमरे और आगे पीछे रिफ्लेक्टर टेप और फाग लाइट जरूरी कर दिया गया। इसके अलावा वाहन और चालक दोनों का फिटनेस सर्टिफिकेट भी साथ रखना होगा।
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जिला प्रशासन ने इन नियमों को पूरा करने के लिए स्कूल संचालकों को 31 दिसंबर तक का समय दिया है। नए साल में ऐसे वाहनों को तुरंत प्रभाव से इंपाउंड किया जाएगा और स्कूली वाहनों के लिए स्पेशल चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि वे बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ न कर सकें।

शुक्रवार को पंचायत भवन में जिले के प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधकों के साथ एसपी पंकज नैन और आरटीए सचिव योगेश समेत अन्य अधिकारियों ने बैठक की। करीब दो घंटे तक चली बैठक में बच्चों के सुरक्षित सफर और नियमों को लेकर मंत्रणा हुई। गौरतलब है कि धुंध होने के कारण अब विजीबिलिटी कम हो गई है और ऐसे में हादसे होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।
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प्रदेश परिवहन प्राधिकरण के जिला सचिव योगेश कुमार ने बताया कि सभी स्कूलों को प्रदेश की नहीं स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी के मानकों अनुसार वाहनों को तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पॉलिसी के तहत सभी स्कूली वाहनों में सीसीटीवी कैमरे, आगे पीछे रिफलेक्टर टेप, छात्राओं के लिए वाहनों में महिला अटेंडेंट की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्हें 31 दिसंबर तक समय दिया गया है, जो वाहन स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरटीए सचिव ने साफ शब्दों ने कहा कि 31 दिसंबर के बाद किसी की बात नहीं सुनी जाएगी। इसके अलावा, स्कूल प्रिंसिपल ने भी आश्वासन दिया है कि वे सभी नियमों को पूरा करेंगे।

फिलहाल ये है स्थिति
परमिट के हिसाब से वाहनों में प्रत्येक छात्र के लिए एक सुरक्षित सीट होनी चाहिए। लेकिन स्कूल अपने फायदे के लिए बच्चे को ठूस-ठूसकर ले जाते हैं। लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। यही नहीं प्रदेश में हुए महिला उत्पीड़न के कई मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी सभी वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए थे, जिसे प्रदेश की स्कूली वाहन पॉलिसी में भी शामिल किया था। लेकिन आज तक किसी भी वाहन में कैमरे नहीं लगा पाए हैं।

वाहनों पर नहीं हैं फायर सेफ्टी उपकरण
अब वाहनों में फायर सेफ्टी व फर्स्ट-एड बॉक्स भी गायब हो गए हैं। ऐेसे में यदि कोई सड़क हादसा हो जाए तो बच्चों को प्राथमिक उपचार देने के लिए भी स्कूल प्रबंधन के पास कुछ नहीं है। स्कूल प्रबंधन अपने फायदे के लिए बच्चों की जान खतरे में डालकर क्षमता से अधिक बच्चों को वाहनों में ढो रहे हैं। नियमानुसार सीट के हिसाब से बच्चों को बैठाया जा सकता है, लेकिन वाहनों में सीट से दो गुणा बच्चों को बैठाया जाता है। दूसरा, स्कूलों द्वारा अभी तक वाहनों पर फॉगलाइट भी नहीं लगाई है। ऐसे में शून्य विजिबिलिटी में दौड़ रहे वाहन बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। लेकिन प्रशासन अभी तक अपने कागजी दावों से ऊपर नहीं उठ पाया है।


क्या कहते हैं स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी के नियम  
- स्कूलों में प्रयोग होने वाले वाहनों का रंग पीला होना चाहिए। लेकिन इस समय अन्य रगों के वाहन भी खुलेआम छात्र ढो रहे हैं।
- स्कूली वाहनों के बाहर पाइप व जाल लगा होना चाहिए। ताकि सफर के दौरान छात्रा खिड़की से हाथ बाहर न निकाल सकें।
- वाहनों में बैक साइड पर आपातकालीन खिड़की व्यवस्था होनी चाहिए।
- वाहनों में फर्स्ट-एड बॉक्स की सुविधा होनी चाहिए।
- वाहनों के अंदर प्रत्येक छात्र के लिए एक सीट होनी चाहिए।
- वाहनों से उतरने के लिए समुचित सीढ़ियां हों।
- वाहनों में उच्च गुणवत्ता का सीसीटीवी कैमरा लगा होना चाहिए।
- खिड़कियों पर पीछे की तरफ इंडीकेटर लिखा होना चाहिए बच्चे उतर रहे हैं।
- जिन वाहनों में छात्राएं स्कूल जाती हैं, उनमें एक महिला अटेंडेंट होनी चाहिए।
- वाहनों में फायर सेफ्टी सिलेंडर का होना जरूरी है।

जिले में दौड़ रहे तीन सौ स्कूलों के हजारों वाहन
जिले में इस समय करीब तीन सौ प्राइवेट स्कूलों की हजारों वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिनमें हजारों की संख्या में छात्र स्कूल आते हैं। कई वाहन तो सुबह सूर्योदय से पहले ही अपने-अपने रूटों पर निकल पड़ते हैं। लेकिन कोई भी पॉलिसी के मानकों के अनुरूप नहीं चल रहा है। इससे सड़क हादसों का अंदेशा बना रहता है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह में पुलिस करेगी जागरूक
एसपी पंकज नैन ने कहा कि सर्दियों में कोहरे के चलते होने वाले सड़क हादसों को देखते हुए यातायात पुलिस एक जनवरी से सात जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाएगी। इसमें वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा नियमों के साथ प्रदेश की नई वाहन पॉलिसी से भी अवगत कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जो स्कूल नई पॉलिसी के नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमारा प्रयास है कि कोई हादसा न हो और इनसे बचने के लिए पहले से ही तैयारी की जाए। स्कूल प्रबंधकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमों का पालन करें, ताकि बच्चे सुरक्षित अपना सफर कर सकें। 
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